हल्द्वानी। महिला अस्पताल, जहां एक नहीं, बल्कि एक साथ दो जिंदगियों का सवाल होता है। गर्भवती महिलाओं की समय-समय पर खून आदि की जांच कराना जरूरी होता है। ऐसे में हल्द्वानी के महिला अस्पताल में घोर लापरवाही सामने आई है। यहां पैथोलॉजिस्ट के बिना खून की जांच की जा रही है और टेक्नीशियन के हस्ताक्षर से रिपोर्ट जारी की जा रही है। अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट के दो पद हैं, पर दोनों ही लंबे समय से खाली हैं।
महिला अस्पताल में रोजाना 50 से अधिक महिलाओं की जांचें होती है। इसके लिए अस्पताल में लैब है। जिस जांच की व्यवस्था नहीं है, उसे एनएचएम से अनुबंधित लैब के माध्यम से कराया जाता है। अस्पताल से जारी होने वाली रिपोर्ट की विश्वसनीयता लैब टेक्नीशियन और पैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर से होती है। अस्पताल से जारी की जा रहीं रिपोर्ट में केवल लैब टेक्नीशियन के हस्ताक्षर हैं, क्योंकि अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट के दोनों पद खाली हैं।
-
अस्पताल में काफी समय से पैथोलॉजिस्ट नहीं हैं। ऐसे में कोई गलती होगी तो टेक्नीशियन जिम्मेदार होगा, लेकिन इससे जांच प्रभावित नहीं हो रही हैं। लैब में कार्य का बोझ बढ़ जाता है। जो जांच अस्पताल में नहीं हो पाती, एनएचएम से अनुबंधित लैब से कराई जा रही हैं।
- डॉ. उषा जंगपांगी, सीएमएस महिला अस्पताल।
-
इलाज यहां कराओ, जांच बाहर होगी
हल्द्वानी। बनभूलपुरा स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना दर्जनों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। केंद्र में केवल एक फिजिशियन हैं, जो दूसरे अस्पताल के हैं और यहां संबद्ध हैं। मरीजों के लिए जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। अनुबंधित लैब की टीम मरीजों की सैंपल इकट्ठे कर जांच के लिए भेज देती है। मरीजों को रिपोर्ट के लिए अन्य जगहों के मुकाबले 24 घंटे अधिक इंतजार करना पड़ता है।