विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। भाजपा और कांग्रेस में नैनीताल जिले में प्रत्याशी चयन के मापदंड को लेकर उलझन बढ़ गई है। अधिकांश सीटों पर ‘एक अनार सौ बीमार’ वाली हालत है। हल्द्वानी सीट पर भाजपा दुविधा में फंसी है। रेनू अधिकारी की दावेदारी के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के पुत्र रोहित शेखर तिवारी और आईएएस सूर्य प्रताप सिंह की सक्रियता को भाजपा की नजदीकियों से जोड़ा जा रहा है।
पार्टी किस जिताऊ प्रत्याशी पर दांव खेल इसे लेकर संगठन के बड़े नेता तमाम समीकरणों पर मंथन कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू होने से स्थानीय नेता और कार्यकर्ता असमंजस में हैं।
हल्द्वानी सूबे की सबसे चर्चित सीटों में शामिल है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत के कैबिनेट में सबसे ताकतवर वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश का हल्द्वानी कार्य क्षेत्र ही नहीं बल्कि मजबूत गढ़ है। वित्तमंत्री डा. हृदयेश के खिलाफ भाजपा प्रत्याशी उतारने में संकट में फंसी है। पार्टी कोई चूक नहीं करना चाहती है। हर समीकरण के लिहाज से स्थानीय संगठन और मतदाताओं की नब्ज टटोलने के साथ माहौल भांप रही है।
रेनू अधिकारी बतौर दावेदार जनसंपर्क में जुटी हैं और हल्द्वानी से भाजपा के सिंबल पर पिछला चुनाव लड़ चुकी हैं। रेनू महिला प्रत्याशी होने के साथ ठाकुर लॉबी में मजबूत पकड़ रखती हैं। उनके पति महेंद्र अधिकारी तत्कालीन हल्द्वानी नगर पालिका के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रह चुके हैं। स्थानीय संगठन और पार्टी के बड़े नेताओं में उनकी मजबूत पकड़ है।
उधर, पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी और आईएएस सूर्य प्रताप सिंह की सक्रियता भाजपा की नजदीकियों से जोड़ी जा रही है। रोहित तिवारी की भले ही खुद की राजनीतिक जमीन न हो लेकिन वह पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के पुत्र हैं।
भाजपा एनडी तिवारी का नाम भुनाकर प्रदेश की बाकी सीटों पर भी दांव खेलना चाहती है। रोहित को कहां से मैदान में उतारा जाए, इसको लेकर पार्टी आलाकमान के साथ खुद रोहित दुविधा में हैं।
लालकुआं, भीमताल और हल्द्वानी में किसी एक सीट से रोहित के चुनाव लड़ने के कयास पखवाड़े भर से लग रहे हैं। प्रदेश भाजपा के एक बड़े ठाकुर नेता रोहित की पैरवी में जुटे हैं। ठाकुर नेता मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल हैं। ठाकुर नेता एनडी तिवारी के बहाने प्रदेश की दूसरी सीटों पर फायदा देख रहे हैं, ताकि मुख्यमंत्री की दौड़ के लिए विधायकों का बहुमत हासिल हो सके।
लालकुआं के बाद हल्द्वानी से पैरवी करने वाले नेता को स्थानीय नेताओं का विरोध झेलना पड़ा है। स्थानीय नेता दो टूक जवाब दे चुके हैं, थोपा प्रत्याशी स्वीकार नहीं करेंगे। रोहित के बीच में लटकने के बाद अब आईएएस सूर्य प्रताप सिंह की सक्रियता से भाजपा में हलचल बढ़ी है।
आरएसएस की एक लॉबी सूर्य प्रताप सिंह को हल्द्वानी से चुनाव मैदान में उतारना चाहती है। रामलीला मैदान की जनसभा से सूर्य प्रताप सिंह जनता को चुनाव लड़ने का संकेत भी दे गए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आचार संहिता लागू होने से पहले भाजपा अपने पत्ते खोल देगी। सीट जीतने के लिहाज से जातीय, स्थानीय समीकरण प्रत्याशी चयन में मजबूत मापदंड बनेगा।