हल्द्वानी। राजनीति में स्वच्छता के लिए अकेले चुनाव लड़ रही थी और सात बीडीसी सदस्य मेरे साथ आए। भाजपा ने खरीद फरोख्त कर अपने प्रत्याशी को जीत दिलाई।
कांग्रेस समर्थित ब्लाक प्रमुख प्रत्याशी सुमित्रा प्रसाद ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि अगला चुनाव भी बिना धनबल के लड़ेंगी। कहा गांधी जी भी अकेले चले थे और मैं भी अकेले चली थी। धीरे-धीरे काफिला बढ़ता चला जाएगा। बीडीसी सदस्यों को सोचना चाहिए कि रूपा देवी में क्या बुराई या क्या अच्छाई लगी और वोट किया। मेरे अंदर क्या बुराई या अच्छाई देखकर वोट नहीं दिया। जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में मेेरा कार्यकाल सभी ने देखा है।
अपनी प्रतिद्वंद्वी रूपा देवी के लिए कहा कि गांव से आई प्रत्याशी और संभवत: कक्षा आठ पास है या उसके जो सर्टिफिकेट हैं सही भी है या गलत है उससे साफ है कि बीजेपी ने अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने के लिए खरीद फरोख्त की होगी।
ब्लाक के बाहर डटे रहे कांग्रेसी
हल्द्वानी। ब्लाक कार्यालय में ब्लाक प्रमुख के लिए मतदान और मतगणना के दौरान कांग्रेसी बाहर डटे रहे। कांग्रेस की प्रत्याशी सुमित्रा प्रसाद को लेकर हारजीत का गणित लगाए जा रहे थे। हालांकि कांग्रेसियों के चेहरे बता रहे थे कि जीत की उम्मीद कम है। कांग्रेसी दावा कर रहे थे कि प्रसाद ने राजनीति में स्वच्छता का संदेश देते हुए चुनाव लड़ा है। जबकि दूसरी ओर सत्ता और धनबल के आधार पर चुनाव लड़ा गया है। सुमित हृदयेश, भोला दत्त भट्ट, संजय किरौला, राजेंद्र खनवाल, नंदन सिंह चौहान, जया कर्नाटक, भागीरथी बिष्ट, गुरुप्रीत सिंह प्रिंस, त्रिलोक कठायत आदि डटे रहे। मतगणना के बाद परिणाम की जानकारी मिलते ही कांग्रेसी निकल गए।
प्रत्येक ब्लाक तक पहुंचाया जाएगा विकास : बेला तोलिया
हल्द्वानी। पंचायत चुनाव में भाजपा का परचम फहरा रहा है। कैबिनेट पूरी होने के साथ ही प्रत्येक ब्लाक में विकास दिखाई पड़ेगी। हल्द्वानी ब्लाक प्रमुख रूपा देवी को बधाई देने पहुंची जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया ने कहा कि बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा। तोलिया ने कहा कि केंद्र सरकार से जो भी योजनाएं आएंगी उनको क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा। सभी ब्लाकों में समानता के साथ काम किया जाएगा।
स्वास्थ्य-शिक्षा पर होगा फोकस : रूपा देवी
हल्द्वानी। हल्द्वानी ब्लाक प्रमुख रूपा देवी ने जीत के बाद कहा कि पार्टी के नेताओं ने जीत में अहम भूमिका निभाई। कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही लोगों की बिजली और पानी की समस्या को दूर कराया जाएगा।
खाली रह गए कांग्रेस के हाथ
जिले में ब्लाक प्रमुख के एक भी सीट नहीं आई कांग्रेस के हाथ
सभी दिग्गजों की रणनीति हो गई ध्वस्त, 2022 के लिए चुनौती
जीते निर्दलीय को कांग्रेस में लाने की तैयारी
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। नैनीताल जिले में कद्दावर नेताओं की कमी नहीं है बावजूद इसके कांग्रेस का हाथ ब्लाक प्रमुख के चुनाव में पूरी तरह से खाली रह गया। कांग्रेसियों की कोई भी रणनीति काम नहीं आई। अब कांग्रेसी सत्ता और धनबल का रोना रो रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले में पिछले दो वर्षों से खासे सक्रिय रहे। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्या नैनीताल से विधायक रह चुकी हैं। दो बार काबीना मंत्री और नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश की बिना सहमति के जिले में पत्ता नहीं हिलता है। कालाढूंगी क्षेत्र कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी का है तो लालकुआं से पुराने कांग्रेस, पूर्व काबीना मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल और भीमताल से पूर्व विधायक दान सिंह भंडारी आते हैं। लंबे समय से कांग्रेस के जिलाध्यक्ष और बेतालघाट के पूर्व ब्लाक प्रमुख सतीश नैनवाल भी इस लिस्ट में आते हैं। बेतालघाट में निर्दलीय आनंदी देवी, धारी में आशा रानी और रामगढ़ में भाजपा की बागी पुष्पा नेगी को जीत मिली। कांग्रेस आठ विकाखंडों में एक भी ब्लाक प्रमुख पद पर अपना प्रत्याशी नहीं जितवा सकी। हालांकि कांग्रेसी इस बात से संतुष्ट हैं कि भीमताल में ज्येष्ठ उप प्रमुख हिमांशु पांडे, रामनगर से संजय नेगी और रामगढ़ से प्रदीप को जीत मिली। जबकि कनिष्ठ उप प्रमुख के पद कोटाबाग से कुलदीप तड़ियाल जीत गए। ज्येष्ठ और कनिष्ठ उप प्रमुख पद पर मिली जीत से ही कांग्रेसी गद्गद हैं। सवाल यह उठता है कि कांग्रेस के इतने दिग्गज क्या 2022 में ऐसे ही कांग्रेस की सत्ता में वापसी करा पाएंगे।
दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश का कहना है कि कोटाबाग से विजयी रवि कन्याल कांग्रेस में आना चाह रहे थे। बेतालघाट में आनंदी देवी भी पार्टी में आना चाहती थी। चुनावी समीकरण को देखते हुए उनको ज्वाइन नहीं कराया गया था। परिणाम साफ हो गए हैं और इनको पार्टी में लाने का प्रयास किया जाएगा। डॉ. हृदयेश ने कहा कि सरकार की ताकत और धनबल के आधार पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। दूसरी ओर जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल का कहना है कि धनबल के आगे कांग्रेस कहीं नहीं ठहर पाई। सुमित्रा प्रसाद बिना धनबल के चुनाव लड़ी और सात लोगों ने वोट दिया।