फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भाजपा में भी एनडी के शिष्यों की भरमार

Thu, 19 Jan 2017 12:09 AM IST
गिरीश रंजन तिवारी
विज्ञापन
एन डी तिवारी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विज्ञापन

उत्तराखंड के दिग्गज नेता नारायण दत्त तिवारी का भाजपा को समर्थन देने का फर्क भाजपा पर भी पड़ना तय है। वर्तमान में भाजपा के  तमाम बड़े नेता तिवारी के पुराने चेले रहे हैं। ऐसे में तिवारी के भाजपा में पैठ पर पार्टी के लिए भी स्थानीय स्तर पर समीकरण बदल सकता है। 
 तिवारी के चाहने वालों में यशपाल आर्या, विजय  बहुगुणा, सतपाल महाराज, शैलेंद्र मोहन सिंघल, महेंद्र अधिकारी, सुबोध  उनियाल सहित तमाम नेता शामिल हैं। साथ ही भगत सिंह कोश्यारी, रमेश  पोखरियाल निशंक भी भाजपा में रहने के बावजूद तिवारी के खास रहे हैं। इन्हीं सब के भरोसे तिवारी पांच साल सरकार चलाने में सफल रहे थे। सतपाल महाराज के साथ तो तिवारी ने 1996 में कांग्रेस छोड़कर कांग्रेस तिवारी बनाई थी और इस पार्टी के कोटे से महाराज को केंद्र में रेल राज्य मंत्री बनवाया था। पीडीएफ के हरीश दुर्गापाल को बमेटा बंगर के ग्राम प्रधान से सीधे विधायक बना देने का श्रेय भी तिवारी को है। तिवारी के भाजपा को समर्थन से हल्द्वानी, लालकुआं, रामनगर, काशीपुर, जसपुर, किछा, कालाढूंगी, भीमताल और नैनीताल की सीटों पर भाजपा को सीधा फायदा  मिलेगा। ये तिवारी की कर्मस्थली रहे हैं। साथ ही पूरे राज्य और यूपी तक में ब्राह्मण वोटों के भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण पर उनका प्रभाव पड़ेगा।
विज्ञापन

 

एनडी का सियासी सफर 
1952 में यूपी में सोशलिस्ट पार्टी से नैनीताल विधानसभा सीट से कांग्रेस को पराजित कर पहली बार विधायक बने, 1963 में वे कांग्रेस से जुड़े और 1965 में काशीपुर से विधायक बनकर यूपी में मंत्री बने। तिवारी 1952, 57, 62, 67, 71, 77, 85 और 89 में यूपी में और 2002 में उत्तराखंड में विधायक रहे। 89 में तिवारी यूपी के अंतिम कांग्रेसी मुख्यमंत्री रहे। तिवारी 1980, 96 और 99 में नैनीताल सीट से सांसद रहे और दो बार केंद्र में कैबिनेट मिनिस्टर बने। तिवारी 1991 में बलराज पासी और 98 में इला पंत से सांसद का चुनाव हारे। 91 में चुनाव जीतने पर उनके प्रधानमंत्री बनने की पूरी संभावना थी। तिवारी 1976 में पहली बार यूपी के मुख्यमंत्री बने थे और 1989 तक तीन बार वहां सीएम बने। एक बार उत्तराखंड में भी सीएम रहे। 
विज्ञापन

एनडी तिवारी ने राजनीति में तमाम उतार चढ़ाव देखे और जब प्रधानमंत्री बनने का वक्त आया तब राजनीति में अनाम रही इला पंत से पराजित हो गए। उत्तराखंड में सीएम बनने पर कांग्रेस के कुछ लोगों विशेषकर हरीश रावत से भारी विरोध झेला। वह एक बार राज्यपाल और योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें