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भाजपा को मंजूर नहीं कि दलित छात्रा चुनाव लड़े

Mon, 09 Oct 2017 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो 
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एमबीपीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में उच्चशिक्षा मंत्री धनसिंह रावत के दखल देने और एनएसयूआई प्रत्याशी का नामांकन खारिज न करने पर प्राचार्य को फटकारने के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। एनएसयूआई प्रत्याशी के बचाव में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता डॉ. इंदिरा हृदयेश आ गई हैं।
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उन्होंने धन सिंह रावत पर दलित उत्पीड़न का आरोप लगाया और मंत्री को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की। यह भी कहा कि वे इस मामले को विधानसभा सत्र में उठाएंगी। रविवार को अपने आवास पर प्रेसवार्ता में डॉ. हृदयेश ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई से अध्यक्ष पद की प्रत्याशी दलित छात्रा मीमांशा आर्या का नामांकन खारिज कराने के लिए उच्चशिक्षा मंत्री ने सारी मर्यादाओं को तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

मंत्री का एमबी कॉलेज के प्राचार्य को इस बात के लिए फटकारना निंदनीय है। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति को एनएसयूआई प्रत्याशी मीमांशा की डिग्री निरस्त करने के लिए फोन करना भी दुखद है। धन सिंह रावत ने मंत्री पद की गरिमा को दरकिनार कर तानाशाह की तरह प्राचार्य को एनएसयूआई प्रत्याशी का नामांकन खारिज करने के का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि मीमांशा ने पढ़ने के लिए ही तो फेल होने पर बीएससी में दोबारा प्रवेश लिया था।
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इसमें इतना बड़ा अपराध क्या हो गया कि सरकार के उच्चशिक्षा मंत्री उसकी डिग्री ही निरस्त कराने को आतुर हो गए।  डॉ. हृदयेश ने कहा कि अहंकार के मद में मंत्री अपनी मर्यादाएं ही भूल बैठे हैं। इस मामले को वह नवंबर में होने वाले विधानसभा सत्र में उठाएंगी। प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है कि ऐसे मंत्री को तत्काल बर्खास्त किया जाए। 

भाजपा की कथनी और करनी का चेहरा सामने आया

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हल्द्वानी एमबीपीजी कॉलेज के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब छात्रसंघ चुनाव में कोई दलित छात्रा  चुनाव लड़ रही है लेकिन उच्चशिक्षा मंत्री उसका नामांकन खारिज कराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह देहरादून में दलित के यहां भोजन करने जाते हैं और वहीं दूसरी ओर हल्द्वानी में उनकी ही सरकार के मंत्री दलित छात्रा को चुनाव लड़ने से रोकना चाहते हैं। 
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