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विपिन चंद्र पांडे ने गरीब बच्चों को गोद लेकर दी शिक्षा 

Sat, 27 Aug 2016 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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‌शिक्षक बिपिन चंद्र पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एचएन इंटर कॉलेज में हिंदी के प्रवक्ता विपिन चंद्र पांडे ने निर्धन बच्चों को पढ़ाई के लिए गोद लेकर समाज के लिए उदाहरण पेश किया है। पांडे को पांच सितंबर को राष्ट्रपति राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। पांडे पुरस्कार को विद्यालय और छात्रों को समर्पित करेंगे।
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पांडे एचएन इंटर कालेज में 1983 से सेवाएं दे रहे हैं। उनका चयन सीटी ग्रेड से हुआ था। इसके बाद उनका चयन एलटी में हुआ और वर्ष 2004 में प्रवक्ता बने। पांडे ने निर्धन बच्चों को पढ़ाने की ठानी और 2003 में शैक्षिक सहायता ट्रस्ट बनाया।

उन्होंने 60 बच्चों को गोद लेकर शिक्षा पर आने वाला खर्च वहन किया। 60 बच्चों में लगभग 30 बच्चे विभिन्न कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं। जबकि एक छात्र रोहित दिवाकर ने मुंबई आईआईटी से एमटेक की पढ़ाई पूरी की और अब आईएएस की तैयारी कर रहा है।
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वर्ष 2015-16 में भी उन्होंने सात बच्चों को पढ़ाई के लिए गोद लिया है। पांडे ने विद्यालय में बुक बैंक भी स्थापित किया। बुक बैंक में कोर्स संबंधी पुस्तकें हैं। पुस्तकें महंगी होने के कारण गरीब बच्चों को पढ़ने के लिए निशुल्क दी जाती है। अभी तक 57 निर्धन छात्रों को पढ़ाई के लिए किताब दी। छात्र परीक्षा होने के बाद पुस्तक वापस करते हैं।

पांडे ने मंगलमय नववर्ष एक रहेगा भारत वर्ष का स्लोगन भी दिया। इसके तहत सर्वधर्म समभाव और राष्ट्रीय एकता कार्यक्रम 2004 में शुरू किया गया। इसके अंतर्गत हर साल एक जनवरी को कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

इसमेें विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों को बुलाकर विद्यार्थियों को सर्वधर्म समभाव और राष्ट्रीय एकता का पाठ पढ़ाया जाता है। पांडे ने बताया कि प्रतिनिधि भी सभी धर्मों के एक होने की बात छात्रों को बताते हैं।

बताया कि एचएन इंटर कालेज में 50 प्रतिशत छात्र अल्पसंख्यक हैं। इस कार्यक्रम से छात्रों में एकता का भाव जागृत होता है। अल्पसंख्यक छात्रों को भी लगता है कि उन्हें एक माना जाता है।

बच्चों को उच्च शिक्षा भी दिलाई जाती है। पांडे ने बताया कि 11 वर्षों से हिंदी प्रवक्ता हैं और सौ प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा। 50 प्रतिशत बच्चों के अंक 60 फीसदी से अधिक रहे हैं।

कहा कि मार्च 2018 में सेवानिवृत्त होना था मगर पुरस्कार मिलने के बाद दो वर्ष और सेवा दे सकेंगे। इन दो वर्षों में छात्रों की बेहतरी के लिए काम करेंगे।

पांडे ने बताया कि विद्यालय के लोगों ने ही पुरस्कार में हिस्सेदारी करने के लिए आवेदन करने को प्रेरित किया। कहा पुरस्कार विद्यालय को और छात्रों को समर्पित करेंगे। बोले पुरस्कार के लिए कभी काम नहीं किया था मगर विद्यालय स्टाफ के सहयोग से पुरस्कार मिलेगा।
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