बीडीसी बैठक में डीएम ने अफसरों की गैरहाजिरी पर नाराजगी जताई। बिन बताए नदारद रहे सहायक समाज कल्याण अधिकारी को सस्पेंड करने की चेतावनी दी। साथ ही बीडीओ को निर्देश दिए कि बिना बताए अवकाश स्वीकृत न करें। डीएम ने अफसरों से स्पष्ट कहा कि अपने कार्यों की जानकारी ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्यों को दें, ताकि विकास कार्यों की मानीटरिंग की जा सके।
शुक्रवार को ब्लाक मुख्यालय में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए डीएम दीपक रावत ने कालूसिद्ध से चंदन सिंह जलाल के घर तक बनी सड़क पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने की शिकायत पर जांच के निर्देश एसडीएम को दिए। क्षेत्र के कई नलकूपों में गंदा पानी आने की शिकायत पर ईई को पानी की जांच कराने के निर्देश दिए। पाटकोट की चोक लाइन सुधारने का कहा। बैठक में आई 81 शिकायतों में से कई का मौके पर ही निस्तारण किया।
अन्य को संबंधित विभागों को भेजने के निर्देश दिए। बैठक में विद्युत, सड़क, पेयजल, नलकूप, सिंचाई स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, पशुपालन, डेयरी विभाग की विस्तृत चर्चा की गयी। ब्लाक प्रमुख संजय नेगी ने बताया कि शीघ्र ही क्षेत्र पंचायत निधि उपलब्ध होने वाली है। सरकार पंचायत एक्ट भी जल्द लाएगी।
इस दौरान ज्येष्ठ प्रमुख आनंद सिंह रावत, कनिष्ठ प्रमुख सहायक शशी देवी, मंडी समिति अध्यक्ष कृष्णा लटवाल, राज्यमंत्री पुष्कर दुर्गापाल, विधायक प्रतिनिधि वीरेंद्र सिंह रावत, प्रभागीय वनाधिकारी कहकशां नसीम, उपजिलाधिकारी चंद्र सिह मर्तोलिया, जिला विकास अधिकारी एएस गुंज्याल, सीएमएस एसएस खड़ायत, विद्युत विभाग के ईई नितिन गर्खाल आदि थे।
इनसेट
डीएम ने रामनगर ट्रांसपोर्ट नगर नहर और ऊंटपड़ाव नहर का निरीक्षण किया। आवासीय क्षेत्रों से सीवरेज व गंदापानी छोड़े जाने पर उन्हें गुस्सा आया। पालिका के अधिशासी अधिकारी मनोज दास को निर्देश दिये कि जिन घरों का सीवरेज व गंदापानी इन नहरों में डाला जा रहा है, उन्हें नोटिस भेजें।
ईओ ने बताया ऊंट पड़ाव क्षेत्र में 72 परिवारों का चिन्हीकरण कर नोटिस दियेे गए हैं। पूरे शहर में 400 लोगों को नोटिस भेजे गए हैं। ईई पेयजल निगम को निर्देश दिए कि रामनगर क्षेत्र के लिए सीवरेज योजना के प्रस्ताव तैयार करें। प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी डीके जोशी को होटलों व रिसोर्ट का निरीक्षण करने को कहा। जोशी ने बताया 34 बड़े रिसोर्ट को नोटिस जारी किये गये है।
क्षेत्र पंचायत की बैठक में अपनी ही समस्या उठाना एक बीडीसी मेंबर को भारी पड़ गया। दरअसल अपने क्षेत्र की एक सड़क को लेकर वह पीडब्लूडी पर आरोप लगाने लगे कि यह सड़क चार साल में ही उखड़ गई है। जब संबंधित विभाग के अधिकारी ने बताया कि सड़क हमारे क्षेत्र में नही आती है, तो गहमागहमी के बीच बीडीसी मेंबर अपनी बात को सही ठहराने के लिये आवेश में बोल पड़े कि यह सड़क मैंने ही बनाई थी।
इसलिए मुझे इसकी जानकारी है। डीएम ने तुरंत बीडीसी मेंबर की बात पकड़ ली और कहा सड़क चार साल में कैसे टूटी, एसडीएम जांच कर रिपोर्ट दें। साथ ही विभाग से मना कर दिया कि यह सड़क आप नहीं बनाएंगे। ठेकेदार ही इस टूटी सड़क को बनवाएगा। इससे सदन में सन्नाटा पसर गया। कुछ देर बाद बीडीसी सदस्य ने सदन से बाहर आना ही मुनासिब समझा।