हल्द्वानी। दृढ़ संकल्प और हिम्मत के साथ किसी भी लक्ष्य को जीता जा सकता है। बस जरूरत है उसे अपने ऊपर हावी न होने दिया जाए। यही हमने भी किया। बीमार होने के बावजूद हमने खुद को बीमार नहीं समझा। ये कहना है कोरोना की जंग जीतकर महीने भर बाद लौटे बनभूलपुरा निवासी जमातियों का। कहा, डॉक्टरों की हमदर्दी ने उनका हौसला बनाए रखा।
मंगलवार और बुधवार को क्षेत्र के चारों युवक जब घर लौटे तो परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इनमें एक की उम्र 21 साल, दूसरे की 24, तीसरे की 25 और चौथे की 32 साल है। बताते हैं कि वह न तो दिल्ली गए, और न ही दिल्ली मरकज से आए किसी व्यक्ति से मिलने की उन्हें कोई जानकारी है। हां, वह 40 दिन के लिए जमात में रामपुर गए थे। जब 40 दिन पूरे हो गए तभी लॉकडाउन हो गया। हमें पता चला कि गाड़ी नहीं मिलने की वजह से लोग पैदल ही अपने घरों को निकल रहे हैं तो हम भी वहां से किसी तरह हल्द्वानी के लिए चल दिए। एक अप्रैल को रुद्रपुर में पुलिस ने रोक लिया और जीबी पंत विश्वविद्यालय में क्वारंटीन कर दिया गया। वहां जांच में कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर तीन अप्रैल को तीन लोगों को सुशीला तिवारी अस्पताल में आइसोलेशन में भर्ती कर दिया गया। उसके बाद कुछ और कोरोना संक्रमित लोगों को यहां लाया गया। 2 वार्डों में 12 लोग थे सभी की उम्र 17 से 35 साल के बीच थी। बस एक बुजुर्ग 63 साल के थे।
बताते हैं कि शुरू में कुछ घबराहट सी हो रही थी, परिजनों की भी चिंता सता रही थी, लेकिन डॉक्टरों के हौसला बंधाने पर उनकी हिम्मत बंधी। 24 वर्षीय युवक ने बताया कि 16 अप्रैल को उसकी दूसरी पॉजिटिव रिपोर्ट आई तो फिर बैचेनी बढ़ गई, लेकिन 19 और 21 अप्रैल को आई निगेटिव रिपोर्ट ने उसे राहत दी। 22 को अस्पताल से डिस्चार्ज कर मोती नगर सेंट्रल भेज दिया गया। ये दिन वे जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। आइसोलेशन के दौरान वे नमाज और दुआओं की भी पाबंदी करते रहे। अब पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट आए। इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं। परिजनों ने भी बुधवार को इफ्तार के समय उनकी पसंद के व्यंजन बनाए और दुआएं कीं।
जरूरत पड़ी तो प्लाज्मा देने को तैयार
कोरोना से जंग जीत चुके चारों युवकों ने कहा कि कोरोना संक्रमित गंभीर रोगियों के लिए अगर जरूरत पड़ी तो वे अपना प्लाज्मा देने को तैयार हैं। उन्होंने अवाम से अपील की है कि कोरोना की गंभीरता को समझें और इससे बचने के जो उपाय बताए जा रहे हैं, उनका पूरी तरह पालन करें।
सहरी और इफ्तारी का भी किया गया प्रबंध
प्रशासनिक व्यवस्था से चारों युवक संतुष्ट दिखाई दिए। उनका कहना है कि उनकी सहरी और इफ्तारी का भी उचित प्रबंध किया गया। 22 अप्रैल को उन्हें एसटीएच से मोतीनगर भेज दिया गया। 25 से रमजान की शुरुआत हुई। उन्होंने हर रोज सहरी, इफ्तार, तिलावत और तरावीह का पूरी तरह एहतिमाम किया।