हल्द्वानी। रिजर्व बैंक ने महंगाई और कच्चे तेल के बढ़ते दामों का हवाला देकर आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया। सात अक्तूबर को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट 0.25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया। बैंक अधिकारियों के मुताबिक जब रेपो दर बढ़ती है तो बैंकों के लिए केंद्रीय बैंक से धन प्राप्त करना महंगा हो जाता है। परिणामस्वरूप वह अपने ग्राहकों को दिए जाने वाले ऋणों पर ब्याज दरें बढ़ा देते हैं। ऐसे में अब आम आदमी को बैंक से लिए गए ऋण के एवज में बढ़ी हुई ब्याज दर का भुगतान करना होगा।
ऐसे पड़ता है रेपो दर का प्रभाव
अधिकारियों के मुताबिक, यदि आरबीआई रेपो दर में कटौती करता है तो बैंकों के लिए आरबीआई से ऋण लेना सस्ता हो जाता है। इस लागत में कमी का लाभ बैंक अक्सर अपने ग्राहकों को कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराकर देते हैं। इससे होम लोन, वाहन लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई (मासिक किस्त) कम हो जाती है। इसके विपरीत, यदि आरबीआई रेपो दर बढ़ाता है तो बैंकों के लिए ऋण लेना महंगा हो जाता है।
क्या असर पड़ेगा आपकी जेब पर?
अधिकारियों के मुताबिक, देश के 90 फीसदी फ्लोटिंग होम लोन अब रेपो से लिंक्ड हैं। बैंक 15-30 दिन में सीमांत लागत पर आधारित उधार दर व बाह्य बेंचमार्क उधार दर बढ़ा देते हैं। यदि किसी व्यक्ति ने 30 लाख रुपये होम लोन लिया है और उसे चुकाने की अवधि 20 साल है तो रेपो रेट बढ़ने से उसके लोन पर ईएमआई लगभग 455 रुपये बढ़ जाएगी। अगर बैंक ईएमआई नहीं बढ़ाता तो भुगतान की अवधि बढ़ा दी जाती है। इसी तरह 15 लाख के वाहन लोन पर पर चार साल में ईएमआई ₹220 रुपये बढ़ जाती है। जबकि यदि कोई व्यक्ति पांच लाख रुपये का पर्सनल लोन लेगा तो उसे तीन साल सालाना 1200 रुपये ज्यादा ब्याज देना होगा।
आरबीआई ने अभी रेपो दर .25 फीसदी बढ़ाकर 5.50 कर दी है। बैंक भी उसी के अनुरूप अपनी ब्याज दरों में वृद्धि करेंगे। यह वृद्धि अलग-अलग अमाउंट पर अलग-अलग रहेगी। - संजीव पुरोहित पूर्व एजीएम पंजाब नेशनल बैंक
रेपो दर बढ़ने से ब्याज दरें परिवर्तित हो जाएंगी और ईएमआई बढ़ जाएगी। ब्याज दरों में भी उतनी ही वृद्धि होगी जितना रेपो रेट बढ़ाया गया है। ईएमआई में कितनी वृद्धि होगी यह ऋण के रूप में ली गई धनराशि पर निर्भर करेगा। - नवीन चंद्र पाटनी सहायक महाप्रबंधक अल्मोड़ा अर्बन बैंक