कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान के बाद परिसर में एक बैलेट पेपर मिलने पर एबीवीपी और एनएसयूआई समर्थक भड़क उठे। उन्होंने परिसर प्रशासन और चुनाव अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए घंटों तक हंगामा काटा। उन्होंने 100 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं को कामर्स रूम में दो घंटे तक बंधक बनाए रखा।
छात्रों का एक धड़ा काउंटिंग कराने और दूसरा चुनाव निरस्त करने की मांग पर अड़ा था। एबीवीपी समर्थित छात्रों ने काउंटिंग करने पर आत्मदाह की धमकी दी। इस बीच चुनाव अधिकारी प्रो.मानवेंद्र पाठक का स्वास्थ्य बिगड़ गया और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। शाम तक मामला न सुलझा तो डीएम डीएसबी परिसर पहुंचे और उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत कर रात आठ बजे मतगणना शुरू कराई।
शुक्रवार की सुबह साढ़े दस बजे परिसर में मतदान प्रक्रिया शुरू हुई, जो अपरान्ह डेढ़ बजे तक चली। मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हो गया। ढाई बजे मतगणना शुरू होनी थी, लेकिन इस बीच छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने एक सादा बैलेट पेपर चुनाव अधिकारी प्रो.मानवेंद्र पाठक और परिसर निदेशक प्रो.एसपीएस मेहता के समक्ष ले जाकर सवाल उठाया कि ये बैलेट पेपर बाहर कैसे आ गया।
वे कोई जवाब नहीं दे सके तो छात्रों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। मौके पर मौजूद एसडीएम वंदना सिंह ने छात्र नेताओं को समझा-बुझाकर मतगणना स्थल से बाहर भेज दिया। इस बीच बैलेट पेपर मिलने की खबर एबीवीपी कार्यकर्ताओं तक जा पहुंची और वे भड़क उठे।
उन्होंने मतदान निरस्त करने की मांग उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। साथ ही चुनाव अधिकारी और परिसर प्रशासन पर सत्ता के दबाव में काम करने और चुनाव में धांधली बरतने का आरोप लगाया।
चुनाव अधिकारी, परिसर निदेशक, कुलानुशासक व अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने छात्रों को समझाया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद छात्रों को अलग-अलग ग्रुप में वार्ता के लिए बुलाया गया। कामर्स हाल में वार्ता के दौरान एबीवीपी के नगर महामंत्री विकास जोशी की चुनाव अधिकारी प्रो. मानवेंद्र पाठक से तीखी झड़प हो गई।
उनका आरोप था कि बीती देर रात चुनाव कमेटी से जुड़े अधिकारी और परिसर प्रशासन के सदस्य कैंपस में आए थे और उन्होंने यहां बैठकर चुनाव में गड़बड़ी की योजना बनाई थी। एबीवीपी से जुड़े छात्र चुनाव निरस्त कराने पर अड़े रहे, ऐसा न होने पर उन्होंने आत्मदाह की चेतावनी दी।
इस बीच एनएसयूआई से जुड़े दर्जनों छात्र भी हंगामा काटते हुए परिसर में पहुंच गए। इससे पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। तनाव बढ़ता देख परिसर के दोनों मुख्य गेट बंद कर प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई।
सूचना मिलने पर एडीएम आरडी पालीवाल और सीओ विजय थापा परिसर में पहुंचे। उन्होंने हंगामा काट रहे छात्रों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। छात्रों के दोनों गुट अपने-अपने पक्ष में नारेबाजी करते रहे। प्रदर्शनकारियों ने कामर्स हाल में मौजूद शिक्षक-शिक्षिकाओं को बंधक बना लिया। दो घंटे तक वे कमरे में बंधक बने रहे।
इस दौरान परिसर निदेशक प्रो.एसपीएस मेहता ने शिक्षकों की बैठक ली, जिसमें अध्यापकों ने विद्यार्थियों पर अराजकता फैलाने और अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए सर्वसम्मति से काउंटिंग न कराने फैसला लिया। इससे एनएसयूआई से जुड़े छात्रों में आक्रोश फैल गया।
हंगामा न थमने पर शाम साढ़े पांच बजे डीएम दीपक रावत डीएसबी परिसर पहुंचे। उन्होंने परिसर निदेशक समेत अन्य शिक्षकों के साथ बैठक कर हालात की जानकारी ली और काउंटिंग करने पर जोर दिया, लेकिन शिक्षकों ने छात्रों पर अभद्रता का आरोप लगाया।
साथ ही कहा कि छात्रों में भी काउंटिंग के लिए सर्वसम्मति नहीं बन रही, जिस पर उन्होंने काउंटिंग करने से इंकार कर दिया। शिक्षकों ने बंधक बनाने पर भी नाराजगी जताई। डीएम ने अध्यापिकाओं से घर जाने को कह दिया। अध्यापिकाओं के साथ ही अधिकांश शिक्षक भी परिसर से चले गए।
बाद में डीएम के समझाने-बुझाने पर परिसर निदेशक प्रो. मेहता ने उपस्थित अध्यापकों की सहमति से काउंटिंग करने का फैसला किया, तब रात आठ बजे कांउंटिंग शुरू हो सकी।