नैनीताल। कुमाऊं मंडल की अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) सुषमा सिंह ने शिक्षा सचिव डी.सेथिंल पांडियन के निर्देश के बाद उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में खराब रिजल्ट देने वाले ऊधमसिंह नगर जिले के एक शिक्षक को लंबित कर दिया है जब कि दूसरे शिक्षक के निलंबन की कार्रवाई के लिए निदेशक को पत्र भेज दिया है। इस बीच विभाग की इस कार्रवाई से खराब रिजल्ट देने वाले शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है। बता दें कि बोर्ड परीक्षाफल की समीक्षा के दौरान शिक्षा सचिव ने पाया कि ऊधमसिंह नगर का रिजल्ट संतोषजनक नहीं रहा है।
इस दौरान उन्होंने पाया कि राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सूर्यनगर (ऊधमसिंहनगर) में कक्षा दसवीं में सभी 23 छात्रों में से एक भी छात्र के उत्तीर्ण नहीं होने पर गणित के सहायक अध्यापक अवनींद्र कुमार को दोषी पाया। दूसरी ओर इसी विद्यालय के अंग्रेजी विषय का रिजल्ट 4.34 फीसदी रहने पर अंग्रेजी के सहायक अध्यापक उपेंद्र कुमार सक्सेना को दोषी पाया गया। इन दोनों शिक्षकों के रिजल्ट को देखते हुए शिक्षा सचिव ने कुमाऊं की एडी सुषमा सिंह को इन्हें निलंबित करने के निर्देश दिए।
इस बीच एडी सिंह ने बताया कि उपेंद्र कुमार सक्सेना को तो शिक्षा सचिव के निर्देश के बाद निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए यूएसनगर के जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक पीएन सिंह को जांच अधिकारी नामित किया गया है। उन्होंने बताया कि अवनींद्र कुमार की पदोन्नति मई माह में जीआईसी धानाचूली में प्रवक्ता के पद पर होने की वजह से वह उन्हें निलंबित करने की अधिकारी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रवक्ताओं के निलंबन की कार्रवाई शिक्षा निदेशक के माध्यम से ही होती है इसकी संस्तुति के लिए उन्होंने निदेशालय को पत्र भेज दिया है।
अपर निदेशक सुषमा सिंह ने बताया कि कुमाऊं मंडल में बोर्ड परीक्षाओं में 60 फीसदी से कम रिजल्ट देने वाले शिक्षकों को विभाग की ओर से प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाती है। सिंह के मुताबिक वर्ष 2013-14 में 834 तथा वर्ष 2014-15 में मंडल के 379 सहायक अध्यापक एलटी को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई थी वर्तमान में वर्ष 2015-16 में खराब रिजल्ट देने वाले शिक्षकों की सूची जिलों से मंगाई जा रही है उसके बाद ही उन शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रतिकूल प्रविष्टि के दायरे में आने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को प्रोन्नत व चयन वेतनमान का लाभ तक तक नहीं दिया जाता जब तक कि वह अपना रिजल्ट 60 फीसदी से अधिक नहीं लाते हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर रिजल्ट देने वाले शिक्षक व शिक्षिकाओं को विभाग की ओर से प्रशस्ति पत्र देने की परंपरा है।