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अप्रैल में जून जैसा जलस्तर 

Wed, 13 Apr 2016 10:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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सर्दियों में कम बारिश के चलते पहाड़ों से निकलने वाली नदियां, कलकल गिरते झरने एवं सूखते प्राकृतिक जल स्रोतों ने भाबर का जल संकट गहरा दिया है। बात अगर गौला की करें तो वर्तमान में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अप्रैल में ही जून जैसी स्थिति हो गई है। गौला का जलस्तर फिलहाल 89 क्यूसेक पर पहुंच गया है, जबकि अप्रैल 2015 में आज के ही दिन जलस्तर 334 क्यूसेक था। पहाड़ों से निकलने वाली नदियों का जलस्तर भी 10 से 15 सेंटीमीटर गिर गया है। 
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भारत सरकार का विभाग केंद्रीय जल आयोग पहाड़ों से निकलने वाली नदियों के जलस्तर, उनके बहाव में परिवर्तन और नदियों की प्रकृति में होने वाले बदलाव पर नजर रखता है। इसके आंकड़े प्रतिमाह एकत्र कर लखनऊ कार्यालय को भेजे जाते हैं।

धौली गंगा तवाघाट, सरयू घाट, गोरीगंगा जौलजीवी, शारदा-काली नदी पंचेश्वर और शारदा बनबसा समेत अन्य नदियों का जलस्तर 10 से 15 सेंटीमीटर गिरा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार गोरी गंगा में पिछले वर्ष जून में जलस्तर 602.600 मीटर था, मार्च 16 में 602.54 मीटर पहुंच गया है। सरयू घाट का पिछले वर्ष जून में 456.543 मीटर था जो मार्च 16 में 456.45 हो गया है। नदियों का जलस्तर 10 से 15 सेंटीमीटर गिरा है। सूत्रों की मानें तो जून का जलस्तर अप्रैल में आ गया है।
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दिनांक/वर्ष       गौला का जलस्तर (क्यूसेक में)   बारिश (01 जनवरी से 13 अप्रैल तक)
13.04.2011     108                                   135   मिली मीटर 
13.04.2012     103                                   239   मिली मीटर 
13.04.2013     130                                   365   मिली मीटर 
13.04.2014     142                                   381   मिली मीटर 
13.04.2015     334                                   364   मिली मीटर 
13.04.2016     89                                      44   मिली मीटर 
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 कोट 
15 मई के बाद गौला का जलस्तर कम होता है। जलस्तर कम होने के बाद मई अंतिम सप्ताह या जून प्रथम सप्ताह में भीमताल झील से पानी छोड़ा जाता है। इस बार अप्रैल में ही जून जैसे हालात होने लगे हैं। 
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-नवीन पांडे, अवर अभियंता, गौला बैराज 
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