नगर निगम कर्मचारियों के लिए प्रशासनिक मुखिया के आदेश कोई मायने नहीं रखते। चतुर्थ श्रेणी और लिपिक वर्ग के पटल तबादले के बाद कुछ ऐसा ही दिख रहा है। तबादले होते ही दो कर्मचारी बीमार पड़ गए हैं, जबकि एक कर्मचारी अभी भी कुर्सी छोड़ना नहीं चाहते हैं।
नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी और लिपिकों की भारी भरकम फौज है। जबकि निगम में अनुभाग (पटल) गिनती के हैं। एक ही पटल में कई कर्मी तैनात हैं। निवर्तमान मुख्य नगर अधिकारी आरडी पालीवाल ने कार्यसमिति के प्रस्ताव पर 19 चतुर्थ श्रेणी और 18 लिपिकों के पटल बदल दिए।
कर्मियों का तबादले करने अगले दिन ही आरडी पालीवाल का तबादला भी हो गया। सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह को मुख्य नगर अधिकारी का अतिरिक्त कार्यभार मिला। नए नगर आयुक्त की तैनाती के साथ तबादले हुए कर्मी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हुए।
मेयर डा. जोगेंद्र सिंह रौतेला ने उप नगर अधिकारी नीरज जोशी से तबादलों को प्रभावी कराने के निर्देश दिए। निगम प्रशासन के दबाव में कर्मी कुर्सी छोड़ने को तैयार हुए। दो कर्मचारी तो तबादला आदेश पहुंचते ही बीमार पड़ गए और अभी तक मेडिकल छुट्टी पर हैं। जबकि एक कर्मी मौजूदा अनुभाग छोड़ना नहीं चाहता है।