टी-20 वर्ल्ड कप टीम में जगह बनाकर उत्तराखंड का नाम रोशन करने वाले युवा खिलाड़ी पवन नेगी सातताल (भीमताल) में स्थित क्रिकेट मैदान में भी अपने फन का जौहर दिखाते हुए चौके छक्के जड़ चुके हैं।
लगभग 11 साल पहले यहां उन्हें प्रतियोगिता के सबसे अनुशासित खिलाड़ी के रूप में पुरस्कृत किया गया था। साथ ही एक दोस्त के साथ झील की ओर जाने पर उन्हें सजा भी दी गई थी। पवन का चयन टी-20 टीम में होने से क्रिकेट प्रतियोगिता के आयोजक गदगद हैं।
वाईएमसीए संस्था की ओर से सातताल में स्थित मैदान में हर साल मई-जून में राष्ट्रीय स्तर की जेके टायर एडवेंचर क्रिकेट प्रतियोगिता कराई जाती है। जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से क्रिकेट एकेडमी की टीमें हिस्सा लेती हैं। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को आयोजकों की ओर से पुरस्कार और प्रमाणपत्र दिए जाते हैं।
क्रिकेट प्रतियोगिता के मुख्य संयोजक आफताब मसीह ने बताया कि वर्ष 2005 में यहां हुई क्रिकेट प्रतियोगिता में पवन नेगी ने आरपी एकेडमी दिल्ली की ओर से हिस्सा लिया था। तब उनके साथ स्वयं आफताब मसीह के अलावा उनके गुरु अजय वर्मा और सुरजीत वर्मा मौजूद थे।
आफताब ने बताया कि यह पहला मौका था जब पवन ने दिल्ली से बाहर निकलकर कोई मैच खेला। उन्होंने बताया कि सातताल के इस मैदान में पवन ने न केवल क्रिकेट की बारीकियां सीखी बल्कि चौके छक्के भी लगाए। बकौल आफताब सातताल में आने वाली क्रिकेट टीमों के खिलाड़ियों के लिए झील की ओर जाने पर सख्ती से प्रतिबंध रहता है।
बावजूद इसके पवन अपने साथी हरजिंदर सिंह के साथ झील में तैरने चले गए। ऐसा करने पर दोनों खिलाड़ियों को सजा भी दी गई थी। आफताब ने बताया कि वर्ष 2005 में आयोजित जेके टायर एडवेंचर क्रिकेट कैंप में अरशद मसीह, वैभव राहुल और मुकुल डागर भी अलग-अलग टीमों से खेले और तीनों ही खिलाड़ियों का चयन रणजी टीमों के लिए हुआ।
पवन ने अपनी मेहनत और लगन के साथ देश की टी-20 वर्ल्ड कप क्रिकेट टीम में स्थान बनाकर उत्तराखंड का नाम रोशन कर दिखाया। आफताब का कहना है कि देश की टीम में जगह बनाने के बावजूद उन्हें उम्मीद है कि पवन सातताल के क्रिकेट मैदान और यहां मिले क्रिकेट के टिप्स को कभी भुला नहीं पाएंगे।