हल्द्वानी। विठौरिया नंबर एक स्थित प्राचीन भूमिया मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन व्यास भुवन चंद्र त्रिपाठी ने अरण्य कांड का वर्णन करते हुए भरत के त्याग और मर्यादा को रामराज्य की नींव बताया।
उन्होंने कहा कि भरत ने सत्ता को अधिकार नहीं, बल्कि दायित्व मानकर निभाया। उनका त्याग आदर्श शासन की मिसाल है। व्यास जी ने बताया कि महर्षि अत्रि के आश्रम में माता अनुसूया ने सीता को धैर्य, धर्म और पतिव्रत धर्म का उपदेश दिया। कथा से पूर्व यज्ञाचार्य चंद्रकांत त्रिपाठी, दिनेश चंद्र शर्मा और पंकज तिवारी ने नित्य पूजन कराया। मुख्य यजमान महेश जोशी, नवीन जोशी, अनिल जोशी और गौरी शंकर कांडपाल रहे। एक पर्णिका योग परिवार के संयोजक मनोज पाठक ने बताया कि सोमवार को कथा के बाद प्रभु की लीलाओं का मंचन होगा। संवाद