अल्मोड़ा में बंदरों और लंगूरों का आतंक इस कदर है कि इनसे निजात
दिलाने के लिए बच्चों को हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वीके बिष्ट
को पत्र लिखकर गुहार लगानी पड़ी।
माननीय हाईकोर्ट ने भी मासूमोें की
चिट्ठियों पर संज्ञान लेते हुए प्रमुख सचिव (वन) और प्रमुख वन संरक्षक
(वन्य जीव) को छह हफ्तों में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
एक्ंिटग चीफ जस्टिस वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की संयुक्त
खंडपीठ के समक्ष सातवीं कक्षा के बच्चों के इस पत्र पर सुनवाई हुई। पंत
निवास अल्मोड़ा निवासी सातवीं के छात्र मास्टर आयूष त्रिपाठी और 52 अन्य ने
हाईकोर्ट के एक्ंिटग चीफ जस्टिस को अलग-अलग कई पत्र भेजे हैं।
इनमें
छात्रों ने एक्टिंग चीफ जस्टिस से बंदरों और लंगूरों के आतंक से निजात
दिलाने की प्रार्थना की थी। पत्र के माध्यम से बच्चों ने कहा है कि बंदरों
और लंगूरों की वजह से उनका कहीं भी आना-जाना मुश्किल हो गया है। उनका कहना
है कि वे कहीं भी खेलने जाते हैं तो वहां लंगूर और बंदर काटने आते हैं।
उनके हाथों से सामान छीन लेते हैं। आते-जाते स्कूल के रास्ते में बैठे रहते
हैं। हाईकोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया और इस पर
स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रमुख सचिव (वन) और प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव)
को छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।