नैनीताल। हाईकोर्ट ने हरिद्वार के रामबड़ेरि गांव में प्रधान और उनके पति की ओर से सरकार से आवंटित धनराशि के खर्च में हुए भ्रष्टाचार के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए पूछा है कि पुलिस ने मामले में अब तक क्या कार्रवाई की। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तिथि नियत की है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी मंगीराम सैनी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हरिद्वार स्थित रामबड़ेरि राजपूताना के अंतर्गत तीन गांव आते हैं। वहां की प्रधान और उनके पति सहित गांव के पंचायत सदस्यों ने सरकार से आवंटित पैसों के खर्च में भ्रष्टाचार किया है।
याचिका में कहा कि याचिकाकर्ता ने 2018 में प्रधान और प्रधान पति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई थी जिसमें आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जांच के बाद पता चला कि फाइल एसआईटी कार्यालय में है। याचिका में कहा कि इसके बाद उसने डीएम को भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रत्यावेदन दिया। डीएम हरिद्वार ने एसएसपी को वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराने को कहा।
जांच अधिकारी ममता बोरा ने सारे अभिलेखों का परीक्षण कर स्वच्छ भारत अभियान के तहत निर्मित शौचालयों में भारी अनियमितताएं पाई। जांच में कब्रिस्तान की दीवार मरम्मत में निम्न स्तर की निर्माण सामग्री प्रयोग में पाई गई।
ग्राम प्रधान द्वारा चोरी से बिजली का निजी कनेक्शन लेना भी पाया गया। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।