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प्रदेश सरकार और राजस्व सचिव से जवाब तलब

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नैनीताल। 2012 में पारित सरकारी और पट्टे की भूमि पर मालिकाना हक के शासनादेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राजस्व सचिव को 24 फरवरी तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
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देहरादून निवासी सुरभि सक्सेना ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने 2012 में एक शासनादेश जारी कर सरकारी भूमि सहित पट्टे की भूमि पर मालिकाना हक के तहत खेती करने और रहने के लिए आवास की अनुमति दी थी। बाद में सरकार ने न्यूनतम मूल्य पर भूमि हस्तांतरित कर दी।
याचिका में कहा गया कि मालिकाना हक के तहत जो भूमि लोगों को मिली है उसे वे लोग काफी ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। रानीबाग (हल्द्वानी) का उदाहरण देते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि कृषि कार्य के लिए 30 हजार सालाना दर पर दी गई दस नाली दो मुट्ठी या 0.217 हेक्टेयर नाली जमीन को पट्टा देने के दो माह बाद ही 40 लाख में बेच दिया गया। पूरे राज्य में इस तरह के हजारों मामले हैं। याचिकाकर्ता ने कृषि कार्य के लिए दी गई भूमि वापस लेने और सभी जमीनों का पट्टा निरस्त करने की मांग की थी। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार और राजस्व सचिव को 24 फरवरी तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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