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इलाका एक और लोग वहीं, फिर कैसे कांग्रेसी-भाजपाई

Mon, 08 Aug 2016 12:08 AM IST
निशांत खनी
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शहर में आजकल सदस्यता अभियान की होड़ मची है। भाजपा और कांग्रेस ही नहीं बल्कि छात्र संगठन भी अभियान चलाकर सदस्यता बढ़ा रहे हैं। रोजाना किसी न किसी दल और नेता के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों के पार्टी से जुड़ने का दावा किया जा रहा है।
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चुनाव नजदीक आने के साथ प्रतिस्पर्द्धा भी तेज हो गई है। काठगोदाम क्षेत्र में रविवार को कांग्रेस और भाजपा का सदस्यता अभियान इस होड़ का महज एक उदाहरण है। सदस्यता अभियान के बहाने नेता शक्ति प्रदर्शन कर जनता का समर्थन जुटाने का दावा कर रहे हैं। 

2017 में विधानसभा चुनाव हैं। राजनीतिक दलों और नेताओं की चुनावी प्राथमिकताएं शुरू हो गई हैं। इनमें सदस्यता अभियान की होड़ सभी दलों और नेताओं की एक जैसी है। चार साल तक जनता के बीच से गायब नेताओं को अचानक ही जनता की फ्रिक सताने लगी है।
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जनता दरबार में जाने के लिए नेताओं के पास आरोप और प्रत्यारोपों के छोड़कर बुनियादी ठोस मुद्दे नहीं हैं। सदस्यता अभियान सबसे आसान जरिया बन रहा है। भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही सदस्यता अभियान में ‘पुरानी बोतल में नई शराब’ जैसी कहावत को सार्थक बना रहे हैं।

अभियान सिर्फ भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन के लिए हो रहा है। दोनों ही दलों में अधिकांश उन्हीं लोगों की सदस्यता का दावा किया जा रहा है जो उन्हीं के संगठनों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।

भाजपा और कांग्रेस की इस होड़ में रोजाना किसी ने किसी इलाके में अभियान चल रहा है। इलाका और लोग वही हैं लेकिन भाजपाई और कांग्रेसियों ने उन्हें अपनी-अपनी पार्टी में बांट लिया है।

भाजपा और कांग्रेस अभियान चलाकर जितने सदस्य बनाने का दावा करते हैं उतने उन वार्डों और गांवों में कुल वोटर तक नहीं हैं। दमुवाढूंगा और काठगोदाम के गांव सबसे बड़े उदाहरण हैं। दमुवाढूंगा पिछड़ा इलाका और वोट बैंक के लिहाज से महत्वपूर्ण है। दोनों ही दलों की नजर यहां के वोट बैंक पर है।

कई लोग तो ऐसे भी हैं जो भाजपा और कांग्रेस के सदस्यता समारोह में भीड़ जुटाते हैं। चुनावी जनसभाओं का दौर चलने के साथ ऐसे लोगों के ‘भाव’ बढ़ जाते हैं। जुटाई गई भीड़ में शामिल अधिकांश लोगों को न नेता से मतलब रहता है और न किसी पार्टी से कोई श्रद्धा। 
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