बजेड़ी गांव के प्राथमिक और पूमावि परिसर में शुक्रवार को जिस वक्त बिजली गिरी, उस समय वहां 108 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। बच्चों पर बिजली की तेज रोशनी और जबरदस्त विस्फोट का ही असर रहा कि वह कुछ देर के लिए सुधबुध खो बैठे और उनके चारों ओर अंधेरा छा गया। कई दहशतजदा बच्चे कुर्सी और मेज के नीचे जा छुपे।
बेतालघाट ब्लाक से लगभग 35 किलोमीटर दूर और गरमपानी से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित बजेड़ी पहाड़ की चोटी पर स्थित गांव है। जिस स्थान पर स्कूल भवन बना है, वहां से लगभग 100 मीटर दूरी पर आबादी (कई बाखलियां) है। स्कूल भवन के चारों ओर चीड़, यूकेलिप्टस, सुरई समेत अन्य प्रजातियों के पेड़ हैं। वर्ष 1991 में बने स्कूल भवन में बिजली गिरने की यह इस क्षेत्र की पहली घटना है।
-अचानक ऐसा लगा कि कोई बड़ा बम फटा हो। चारों ओर चिंगारी दिखी और उसके बाद क्या हुआ और कब मुझे अस्पताल में लाए कुछ पता नहीं। -लक्ष्मण सिंह, कक्षा 6
-धमाका होते ही मेरी आंख के सामने चिंगारी नजर आई और चारों ओर अंधेरा छा गया। -करन सिंह, कक्षा 6
-पढ़ते-पढ़ते ऐसा महसूस हुआ कि कमरे में आग लग गई। उसके बाद मुझे कुछ पता नहीं चला। -बालम सिंह, कक्षा 5
-तेज धमाका होते ही मैं काफी डर गई थी और बेहोश हो गई। -अंजू बिष्ट, कक्षा 6 (गंभीर घायल)
-हम सभी बच्चे कमरे में बैठकर पढ़ाई कर रहे थे तभी अचानक बम फटा और कमरे में चिंगारी निकली। चिंगारी मेरे पैर तक पहुंची तो मानो जैसे करंट लग गया था। इससे मैं काफी डर गया था। -रोशन सिंह, कक्षा 2
-मैं बच्चों को पढ़ा रही थी तभी मेरे सामने बिजली का बड़ा गोला सा गिरा और आंखों के सामने अंधेरा छा गया और एक पल के लिए कुछ समझ में नहीं आया। इसी दौरान मैं बच्चों को बचाने के लिए उनकी ओर भागी और उन्हें नियंत्रित किया। धमाके का असर मेरे एक कान पर भी पड़ा है, जिससे मुझे कम सुनाई दे रहा है। -हेमा कार्की, सहायक अध्यापिका
-साढ़े दस बजे सभी बच्चे कक्षाओं में थे। तभी अचानक तेजी से विस्फोट के साथ धरती में कंपन महसूस हुआ। छठी कक्षा की छात्रा अंजू तब तक अचेत हो चुकी थी। उसे होश में लाने के लिए उसके पैरों की मालिश की और उसे अस्पताल पहुंचाया गया। -इस्माइल अंसारी, प्रधानाध्यापक
-साढ़े दस बजे अचानक धमाके के साथ कमरे में लगे मीटर में भी विस्फोट हुआ। धू-धू कर जलती विद्युत लाइन की चिंगारी मेरी जैकेट में पड़ी, जिससे जैकेट जल गई। -सुरेंद्र सिंह बंगारी, सहायक अध्यापक