युगमंच संस्था के सहयोग से प्रसिद्ध जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ और वीरेन डंगवाल ‘वीरेनदा’ स्मृति में रविवार को नैनीताल क्लब के शैले हाल में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन के माध्यम से दोनों विभूतियों को श्रद्धांजलि दी गई।
कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी भावपूर्ण कविताओं व जन गीतों के माध्यम से श्रोताओं को अन्याय, अत्याचार, माफिया संस्कृति के खिलाफ लड़ने के लिए उद्वेलित किया। इस मौके पर पद्मश्री प्रो. शेखर पाठक ने स्व. गिर्दा, वीरेनदा व एमएम कुलकर्णी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह लोग हमेशा ही जन संघर्षों से जुड़े रहे और उन्होंने असहिष्णुता का विरोध किया। कवि सम्मेलन की शुरुआत में लता त्रिपाठी ने गिर्दा की प्रसिद्ध रचना ‘जैंता एक दिन तो आलो दिन यो दुनि में’ तथा विरेनदा की रचना ‘आयेंगे, उजले दिन जरूर आएंगे, मैं नहीं तसल्ली झूठमूठ की देता हूं’ कविता पाठ किया।
बाजपुर से आए युवा कवि तकी बाजपुरी ने धार्मिक उन्माद का विरोध करते हुए अपनी कविता सुनायी। दिनेश उपाध्याय की जुल्म व शोषण के खिलाफ, जनकवि बल्ली सिंह चीमा की कविता ने खूब वाहवाही बटोरी। काशीपुर के मनोज आर्य ने कहा कि उनके निर्देश पर गजल लिखना, यानी असफल को भी सफल लिखना है।
युगमंच के संस्थापक जहूर आलम ने दैवीय आपदा से हुई त्रासदी पर कविता पढ़ी, ‘हमेशा की तरह फिर से दरक रहा है पहाड़, पड़े जो छीटें तो सरक रहा है पहाड़’। संचालक हेमंत बिष्ट के अलावा पालिकाध्यक्ष श्याम नारायण, डॉ. दीपा कांडपाल, मोहन सिंह रावत, राजीव कुमार, प्रभात गंगोला, राजीव कुमार, एमएस बृजवाल, दिनेश कुंजवाल, महेश बवाड़ी, त्रिभुवन फर्त्याल, हरीश पंत, प्रदीप पांडे, विनोद पांडे, त्रिभुवन फर्त्याल कवितचा पाठ किया। इस मौके पर प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट बटरोही, डॉ. उमा भट्ट, डॉ. शीला रजवार, राजीव लोचन साह, हेमलता तिवारी, तुहिनांशु तिवारी, प्रो.नीरजा टंडन, राजा साह, भाष्कर बिष्ट समेत कई रंगकर्मी मौजूद थे।