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नीरी की रिपोर्ट के बाद ही स्वीकृत होंगे भवन मानचित्र

Tue, 07 Mar 2017 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल
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कोर्ट, कंज्यूमर फोरम - फोटो : फाइल फोटो
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हाईकोर्ट ने नैनीताल झील के संरक्षण के लिए केंद्रीय सरकार की संस्था नीरी (नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, नागपुर) को नैनीताल झील का निरीक्षण करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि नीरी की आख्या के बाद ही भवन निर्माण मानचित्र को स्वीकृत किए जाएं। अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।
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सोमवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। पूर्व में कोर्ट ने तारा सिंह राजपूत की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद निर्णय दिया था कि नैनीताल, भीमताल, खुर्पाताल, सातताल और नकुचियाताल झीलों के दो किलोमीटर के दायरे में केंद्रीय सरकार की स्वायत्त संस्था नीरी से भूमि की भार वहन क्षमता का आकलन करने के बाद ही कोई निर्माण कार्य हो।  

इस मामले में एलडीए ने प्रार्थना पत्र देकर अदालत के सात नवंबर 2016 को जारी आदेश को संशोधित किए जाने की अपील की थी। एलडीए के अनुसार उसने लगभग 59 भवनों के मानचित्र स्वीकृत के लिए आवश्यक कार्यवाही पूरी कर ली है।
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इस आदेश के कारण ये मानचित्र स्वीकृत नहीं हो पा रहे हैं। हाईकोर्ट के अधिवक्ता और न्यायमित्र सीडी बहुगुणा ने सुनवाई के दौरान तर्क प्रस्तुत किया कि यदि उक्त मानचित्रों को नीरी की आख्या के बिना स्वीकृत किया गया तो उच्च न्यायालय का सात नवंबर 2016 को पारित आदेश महत्वहीन हो जाएगा।

उन्होंने कहा भी कहा कि नैनी झील का जलस्तर कम होने से नैनीताल शहर का अस्तित्व खतरे में आ गया है। ऐसे में नीरी को आदेशित किया जाए कि वह आकलन कर आख्या कोर्ट में प्रस्तुत करें। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 अप्रैल की तिथि नियत की है।
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