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बाल विकास विभाग में नियम विरुद्ध निविदा निकालने का आरोप

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बाल विकास विभाग में नियम विरुद्ध निविदा निकालने का आरोप
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प्रिंटिंग सामग्री के साथ प्रिंटिंग से इतर सामग्री क्रय करने का भी उल्लेख
स्थानीय उद्यमियों की उपेक्षा कर बाहरी उद्यमियों को निविदा दिए जाने की साजिश बताया
स्थानीय उद्यमियों की आपत्ति और प्रार्थना पत्रों को भी नजर अंदाज करने का है आरोप।
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। प्रदेश के बाल विकास विभाग की ओर से अजीबोगरीब निविदा जारी करने का मामला प्रकाश में आया है। बताया गया है कि प्रिंटिंग से संबंधित निविदा में प्रिंटिंग से इतर सामग्री का भी उल्लेख किया गया है जबकि प्रिंटिंग सामग्री की निविदा के साथ इतर सामग्री की निविदा आमंत्रित करना नियम विरुद्ध है। विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में मुख्यमंत्री की स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट लोकल फॉर वोकल का भी सरासर उल्लंघन किया गया है।
स्थानीय लघु उद्यमी उत्तरायण प्रकाशन हल्द्वानी के घनश्याम भट्ट, सालम सेल्स के संतोष जोशी, बागनाथ पेपर प्रोडक्ट बागेश्वर के दलीप सिंह खेतवाल, समय साक्ष्य देहरादून की रानू बिष्ट, एमएस प्रिंटर्स हल्द्वानी के महेश जोशी, एचजे इंटरप्राइजेज हल्द्वानी के जगदीश जोशी, हिमाद्रि प्रकाशन अल्मोड़ा के संजय डालाकोटी ने आरोप लगाया है कि महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास निदेशालय की ओर से 27 मई 2021 को जारी ई निविदा में प्रिंटिंग सामग्री के साथ ही इतर सामग्री जैसे टोपी, घड़ी, बैग, रेडियो वॉयस, जिंगल्स, छाता, गुब्बारे आदि को भी इसी निविदा में सम्मिलित किया गया है, जबकि प्रिंटिंग से इतर सामग्री की निविदा अलग से जारी की जानी चाहिए। निविदा दाता का सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये मांगा गया है, जबकि उत्तराखंड में 10 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर किसी भी लघु उद्यमी का नहीं है। ई निविदा की दरों को दो साल के लिए अनुबंध करने का प्रावधान किया गया है जो नियम विरुद्ध है। आईएसओ और प्रदूषण प्रमाणपत्र निविदा के साथ अनिवार्य रूप से मांगा गया है, जो प्रिंटिंग उद्योग में लागू नहीं होता है। निविदादाताओं से लैब टेस्ट रिपोर्ट भी मांगी गई है, जबकि लैब टेस्ट रिपोर्ट देने का भी कोई नियम नहीं है। तकनीकी निविदा के मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने का समय निविदा पेश करने से एक दिन पहले मांगा गया है जिससे निविदा की गोपनीयता प्रभावित होती है।
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उद्यमियों ने आरोप लगाया कि यह सब अपने किसी चहेते उद्यमी के नाम निविदा जारी करने की साजिश है। इससे जहां लोकल फॉर वोकल की अवधारणा का हनन होता है वहीं स्थानीय उद्यमियों को इसमें भाग लेने से वंचित किया जा रहा है। विभाग द्वारा निविदा से पूर्व तीन जून को गूगल मीट के माध्यम से प्री बिड बैठक आहूत की गई थी, जिसमें उद्यमियों से सुझाव मांगे गए थे लेकिन उद्यमियों द्वारा दिए गए किसी भी सुझाव पर अमल नहीं किया गया।
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कोट
विभाग ने नियमानुसार टेंडर आमंत्रित किए हैं। टेंडर में सभी की इच्छाओं की पूर्ति नहीं की जा सकती। कमेटी जो निर्णय लेगी, उसके अनुरूप निर्णय लिया जाएगा। जो पात्र होगा, उसके पक्ष में टेंडर स्वीकृत होंगे। -एचसी सेमवाल, निदेशक, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास।
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