हल्द्वानी। आग की बढ़ती घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सोमवार दोपहर को डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में फायर मॉक ड्रिल की गई। मेडिकल कॉलेज के उप प्रबंधक विद्युत रवि पाल ने अस्पताल के डॉक्टर, नर्सिग स्टाफ, वार्ड बॉय समेत अन्य कर्मियों को आग पर काबू पाने के तरीके बताए। बताया कि अस्पताल में फायर अलार्म सिस्टम है जो 40 डिग्री से ज्यादा तापमान होने पर कार्य करता है।
मॉक ड्रिल में बताया गया कि आग की अधिकतर घटनाएं घरेलू गैस के रिसाव, ज्वलनशील पदार्थाें और शॉर्ट सर्किट से होती हैं। फॉयर मॉक ड्रिल में सिर्फ गत्ता जलाकर उसे अग्निशमन यंत्रों से बुझाने का अभ्यास स्टाफ को कराया गया। इस दौरान परिसर में हाइड्रेंट लाइन से पानी की बौछार कर आग पर काबू पाया गया। करीब एक घंटा चले कार्यक्रम में किसी कमरे में धुंआ उठने आदि पर आग बुझाने का अभ्यास नहीं हुआ। उप प्रबंधक विद्युत रवि पाल ने कहा कि अस्पताल के फायर कंट्रोल रूम में स्थापित अग्निशमन यंत्रों में मोनो अमोनियम फॉस्फेट केमिकल होता है जिससे सभी प्रकार की आग पर काबू किया जा सकता है। प्राचार्य डाॅ. अरुण जोशी ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से समय-समय पर अग्निशमन यंत्रों को चेक किया जाता है। कर्मचारियों को किसी भी अग्नि दुर्घटना से निपटने के लिए प्रशिक्षित होना आवश्यक है।
भीषण गर्मी में भी अस्पतालों में 2128 मरीज इलाज को पहुंचे
हल्द्वानी। सुशीला और बेस अस्पताल में सोमवार को 2128 की ओपीडी हुई। एसटीएच के मेडिसिन विभाग में सबसे ज्यादा 1837 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। मेडिसिन विभाग में 270, नाक-कान-गला में 228, हड्डी रोग विभाग में 195 और सर्जरी में 154 की ओपीडी हुई।