हल्द्वानी। महिला अस्पताल का स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट केवल नाम का रह गया है। स्टाफ की कमी और रात में आने वाले गंभीर मामलों में गर्भवती और प्रसूता को एसटीएच रेफर कर दिया जाता है। इस कारण महिला अस्पताल रेफरल सेंटर बन गया है।
महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं, जच्चा-बच्चा के लिए 12 बेड के न्यूबॉर्न केयर यूनिट में 10 कर्मियों का स्टाफ सृजित है लेकिन वर्तमान में चार कर्मचारी तैनात हैं। महिला अस्पताल में प्रतिदिन पांच से छह डिलीवरी होती हैं। ऐसी महिलाएं जिन्हें लेबर पेन समय से पहले हो और बच्चा कम वजन का हो, उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल भेज दिया जा रहा है। महिला अस्पताल में सिर्फ फोटो थेरेपी के माध्यम से ही बच्चों का इलाज हो रहा है। रात की शिफ्ट में पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से ज्यादा दिक्कत रहती है। अस्पताल प्रशासन की ओर से डीजी हेल्थ को समस्या बताई गई लेकिन आचार संहिता लगने के कारण मामला लटका है।
ईएमओ और गायनी की संख्या कम
महिला अस्पताल में इमरजेंसी डॉक्टरों के आठ पदों में पांच ही ईएमओ हैं। एनेस्थीसिया में एक और गायनी डॉक्टरों में आठ में से केवल तीन ही कार्यरत हैं। पैथलोजिस्ट के स्वीकृत दोनों पद खाली चल रहे हैं।
कुछ दिन पहले डीजी हेल्थ ने एनएचएम के माध्यम से स्टाफ की मांग करने को कहा था। इसके बाद हमने एनएचएम को पत्र भेज दिया है। पांच से छह कर्मचारियों की मांग की है। इसकी जानकारी डीजी हेल्थ को भी दे दी है।
ऊषा जंगपांगी, सीएमएस, महिला अस्पताल
केस- सोमवार शाम 4.45 बजे क्वैराली पनुवानौला अल्मोड़ा से भावना (25) पत्नी विनोद कुमार को तीन किलो वजन का बच्चा पैदा हुआ था। सांस लेने में दिक्कत के चलते जच्चा-बच्चा को एसटीएच रेफर किया गया।