भारी सुरक्षा बल के साथ रेलवे, प्रशासन की टीम ने सोमवार को लाइन नंबर-17 से शनि बाजार तक संयुक्त सीमांकन किया। इस बार सीमांकन में टीम को विरोध का सामना नहीं करना पड़ा। टीम ने सीमांकन करने के साथ 900 कब्जेदारों को नोटिस दिया है।
संयुक्त टीम का अभियान सुबह नौ बजे से शुरू हुआ। इस दौरान टीम ने करीब सवा किमी एरिया की नपत और जांच की है। पूर्वोत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह कहते हैं कि 29 एकड़ एरिया का सीमांकन चल रहा है।
इसके तहत टीम ने रेलवे के चिन्हीकरण संख्या 80/200 से 82/400 तक एरिया का सीमांकन किया है। इसमें टीम ने सात सीमांकन पीलर लगाए हैं। इसके अलावा 900 लोगों को नोटिस दिया गया है।
सीमांकन कार्य के दौरान किसी तरह का प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा। मंगलवार को भी सीमांकन होना है, इसमें बचे हुए 400 मीटर एरिया की नपत (गौजाजाली के करीब) तक का एरिया शामिल होगा।
सीमांकन के दौरान रेलवे के राज्य संपदा अधिकारी अरुण कुमार, आरपीएफ कमांडेंट आरआर मीणा के अलावा प्रशासन के सिटी मजिस्ट्रेट केके मिश्रा, एसपी सिटी यशवंत सिंह, सीओ लोकजीत सिंह समेत अन्य अधिकारी इलाके में डेरा डाले रहे।
23 जनवरी को होगी सुनवाई
रेलवे टीम ने कब्जेदारों को नोटिस दिया है। उनको अपना पक्ष रखने का मौका 23 जनवरी को दिया गया है। पीआरओ के अनुसार डीआरएम इज्जतनगर (बरेली) में राज्य संपदा अधिकारी के यहां संबंधित कब्जेदार अपना पक्ष रख सकते हैं।
सीमांकन को लेकर रही नाकेबंदी
रेलवे के सीमांकन के दौरान बनभूलपुरा क्षेत्र में सुबह से दोपहर तक नाकेबंदी कर दी गई थी। गौलापार से आने वाले वाहनों को बाईपास की तरफ मोड़ा गया। नंधौर वैली रोड पर बड़े वाहनों को रोक दिया गया था। अंदर गलियों में भी वाहनों के जाने की इजाजत नहीं थी।
सीमांकन के चलते सुबह दस बजे से ही गौलापुल और ताज चौराहे पर बड़े वाहनों का आवागमन रोक दिया था। दोनों तरफ पुलिस ने रस्सी लगाकर चौकसी बरती। इसी प्रकार लाइन नंबर 17 में भी बड़े वाहनों के आवागमन पर रोक था।
दोपहर तीन बजे सीमांकन कार्य समाप्त होने के बाद पुलिस ने गौलापार से बनभूलपुरा आने वाला मार्ग सुचारू किया। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि यह व्यवस्था सुरक्षा के मद्देनजर की गई थी।
थानाध्यक्ष बोलते रहे फोर्स नहीं आई
कांग्रेस कार्यकर्ता अरशद के घायल होने पर हंगामे के बाद थानाध्यक्ष नीरज भाकुनी ने फोर्स को मौके पर बुलाया लेकिन पुलिस सिर्फ रेलवे लाइन से देखती रही। कोई जवान नीचे उतरकर देखने तक नहीं आया। हालांकि बेस अस्पताल में मदद से लिए सीपीयू और कोतवाली की पुलिस पहुंच गई थी।