नैनीताल। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज) में प्रख्यात एयरोसोल भौतिक विज्ञानी प्रो. वाईएस मैय्या ने मंगलवार को छोटे कण, बड़ा प्रभाव: एयरोसोल की वैश्विक प्रासंगिकता पर एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि एयरोसोल सूर्य की रोशनी को परावर्तित (ठंडा करना) या अवशोषित (गर्म करना) कर सकते हैं। ऐतिहासिक रूप से मानवजनित एयरोसोल, विशेष रूप से सल्फेट्स ने उत्तरी गोलार्ध में शीतलन प्रभाव डाला है जो ग्रीनहाउस गैसों से होने वाली गर्मी को कम करता है। एयरोसोल बादल संघनन नाभिक के रूप में कार्य करते हैं जो बादलों के बनने, उनके जीवनकाल और वर्षा पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं जिससे वैश्विक जल चक्र प्रभावित होता है। बता दें कि प्रो. मैय्या 51 वर्षों से सूक्ष्म कण विज्ञान और उसके तकनीकी अनुप्रयोगों पर शोध कर रहे हैं। उनके मौलिक योगदानों में ब्राउनियन गति, एयरोसोल चार्जिंग और रोग संचरण जैसे विषय शामिल हैं।