डीएसबी परिसर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में अमेरिका से आए पत्रकार अशोक ओझा ने ‘विदेशों में हिंदी का विकास एवं हिंदी के माध्यम से विदेशों में रोजगार के अवसर’ पर व्याख्यान दिया।
अमेरिका की युवा हिंदी संस्था के अध्यक्ष और स्टारराक हिंदी कार्यक्रम के निदेशक अशोक ओझा ने कहा कि अमेरिका का हिंदी के प्रति नजरिया गत वर्षों में बदला है और अब वहां इसे बहुत सम्मान मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि इसमें रोजगार की काफी संभावनाएं भी हैं। कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी ने मीडिया से नई तकनीक और नया नजरिया अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सबसे बेहतर समाचार पत्र वह है, जो जन भावनाओं का सच्चा प्रतिनिधि हो।
कार्यक्रम में यूओयू के प्रो. गोविंद सिंह ने 19वीं सदी की शुरुआत से हिंदी को लेकर की गई राजनीति और इसके देश के प्रति दुष्परिणामों की चर्चा की। परिसर निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता ने विदेशों में कार्यरत भारतीयों से देश के विकास में योगदान की अपेक्षा जताई।
उन्होंने कहा कि विदेश में रह रहे औैर वहां से लौटने वाले लोग देश के विकास में योगदान न दें तो उनका विदेश जाना बेकार है। प्रो. बीएस बिष्ट ने अपनी बोलियों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में न केवल हिंदी बल्कि गढ़वाली कुमाऊंनी और अन्य बोलियों को भी विकसित करना जरूरी है।
पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गिरीश रंजन तिवारी ने रोजाना के कार्यों में हिंदी को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि अमेरिका की सरकार ने स्वीकारा है कि समय पर हिंदी को महत्व मिलता तो आतंकी वार्तालाप डिकोड होने से 9/11 की घटना न होती।
कार्यक्रम में प्रो. नीरजा टंडन, प्रो. अजय अरोरा, प्रो. चित्रा पांडे, प्रो. मानवेंद्र पाठक, प्रो. ललित तिवारी, पूनम बिष्ट, सुचेतन शाह, शशि पांडे सहित विद्यार्थी उपस्थित थे। आयोजन में चंदन राम, अंचल पंत, मोहित साह, विजय सिरारी, नवीन भट्ट, नृपेन सरकार, पंकज जीना, हितेश कपिल, विनय जोशी, हिमांशु ओली, सरिता भट्ट, पीयूष खंडूजा, अरुणजीत, नितिन आर्या का योगदान रहा।
देवभूमि के कण-कण में देवत्व का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता विभाग के शोध छात्र नवीन जोशी द्वारा लिखित पुस्तक देवभूमि के कण-कण में देवत्व का विमोचन कुलपति प्रो. एचएस धामी, अशोक ओझा, प्रो. एसपीएस मेहता, प्रो. बीएस बिष्ट, प्रो. गोविंद सिंह आदि ने किया।
धामी ने जोशी के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड को देवभूमि इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां समाज की वास्तविक सेवा करने वालों को भी देवता का दर्जा प्राप्त है। लेखक जोशी ने पुस्तक की जानकारी देते हुए कहा कि इसमें क्षेत्र के इतिहास, परंपराओं, धार्मिक व सामान्य पर्यटन आदि की जानकारी दी गई है।