बच्चों के एडमिशन को लेकर अभिभावक पब्लिक स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं। जबकि मिशनरी स्कूलों ने तो ‘नो एडमिशन’ के नोटिस बोर्ड पर लगा दिए हैं। वहीं कई पब्लिक स्कूल अपने यहां एडमिशन देने के लिए कई तरह के प्रचार का सहारा ले रहे हैं।
इधर, पब्लिक स्कूलों ने नये सत्र से अपने यहां मासिक फीस में भी दस फीसदी बढ़ोत्तरी कर दी है। इस संबंध में अभिभावकों को स्कूलों द्वारा एसएमएस के माध्यम से सूचना दी गई है।
शहर एवं आसपास के ग्रामीण इलाके में 45 से अधिक पब्लिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। नया शिक्षा सत्र नजदीक आते ही बच्चों के एडमिशन को लेकर अभिभावकों की परेशानी बढ़ा दी है। मिशनरी स्कूलों द्वारा ‘नो एडमिशन’ का नोटिस चस्पा किए जाने के बावजूद अभिभावक अपने लाडले का एडमिशन कराने के लिए सुबह से ही स्कूलों में लाइन लगा ले रहे हैं।
इन स्कूलों के प्रधानाचार्य द्वारा स्पष्ट मना करने के बाद भी अभिभावक किसी भी तरह अपने बच्चे का एडमिशन कराने की जुगत में लगे हैं। हालांकि मिशनरी स्कूलों ने केवल एलकेजी में अपने यहां एडमिशन किए थे, बाकी कक्षाओं में नहीं किए जा रहे। इसके अलावा अन्य कुछ प्रमुख पब्लिक स्कूलों में भी एडमिशन को लेकर अभिभावक चक्कर काट रहे हैं लेकिन इन स्कूलों में एडमिशन की प्रक्रिया को काफी महंगा कर दिया गया है।
एडमिशन शुल्क के नाम पर मोटी फीस ली जा रही है। कुछ ही पब्लिक स्कूल ऐसे हैं जो एडमिशन शुल्क के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस नहीं वसूल रहे। इधर, पब्लिक स्कूलों ने नये शिक्षा सत्र से मासिक शुल्क में दस प्रतिशत फीस भी बढ़ा दी है। इस तरह नये सत्र से अभिभावकों की जेब पर और बोझ बढ़ने वाला है। इस बारे में पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार निजी स्कूल दस प्रतिशत फीस बढ़ा सकते हैं। इसी के अनुरूप फीस वृद्धि की गई है।