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Nainital News: उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों के लिए आगामी दस वर्षों की कार्ययोजना तैयार

Sun, 11 May 2025 02:12 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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नैनीताल। शिक्षण पद्धतियों को बेहतर बनाने, संसाधनों को बढ़ाना देने और छात्रों के लिए सहायक वातावरण बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों के लिए आगामी दस वर्षों की कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है। उत्तराखंड के कुमाऊं विवि, सोबन सिंह जीना अल्मोड़ा विवि और श्रीदेव सुमन विवि के विभागाध्यक्षों से विभागों की सुविधाओं के संबंध में जानकारी मांगी हैं ताकि इसके लिए जल्द ही बजट जारी किया जा सके।
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इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट प्लान (आईडीपी) के तहत राज्य के छात्र-छात्राओं को बेहतर सुविधाएं देने और शिक्षण पद्धतियों को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के तहत यूजीसी के सहयोग से कुमाऊं विवि के हर्मिटेज सभागार में तीनों विश्वविद्यालयों के कुलपति व यूजीसी की टीम ने इस संबंध में गहन चर्चा की।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीएस रावत ने किया। इस मौके पर पूर्व कुलपति प्रो. वीपीएस अरोरा, प्रो. संजय पंत, डॉ. राजीव उपाध्याय, डॉ. स्नेहा भसीन, डॉ. पीएस बेनर्जी, डॉ. देवेंद्र और डॉ. रितेश साह ने विचार रखे।
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कुमाऊं विवि प्राध्यापक डॉ. राजीव उपाध्याय ने बताया कि आईडीपी योजना से विवि के विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत विद्यार्थियों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसका विशेष ख्याल रखा गया है। देश-विदेश में संचालित बड़े-बड़े संस्थानों में मिलने वाली सुविधाओं की तर्ज पर राज्य के विवि के छात्रों को भी सुविधाएं मिलेंगी। इसके लिए विभागों से डाटा मांगा गया है, जुलाई तक सभी दस्तावेज जमा होंगे जिसके बाद सरकार को प्रस्ताव भेजे जाएंगे। प्रस्ताव पास होने के बाद एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की ओर से आर्थिक सहयोग दिया जाएगा।
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यह मिलेगा लाभ
- ऑनलाइन पाठ्यक्रम, डिजिटल संसाधन और अन्य तकनीकी उपकरणों का लाभ मिलेगा।
- शोध के लिए धन और संसाधनों को बढ़ावा मिलेगा।
- शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाएगा और शोध परिणाम अधिक प्रकाशित होंगे।
- प्रशिक्षण, विकास कार्यक्रम के माध्यम से कर्मचारियों प्रशिक्षित किया जाएगा।
कोट
- शॉर्ट टर्म दो वर्ष, मीडियम टर्म पांच वर्ष और लॉंग टर्म के तहत दस वर्ष का प्लान तैयार किया गया है। ताकि छात्र-छात्राओं को बुनियादी सुविधाओं के साथ ही शिक्षा का बेहतर माहौल मिल सके। सभी विवि के परिसरों व महाविद्यालयों के विभागाध्यक्षों से डाटा मांगा है, ताकि बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सके। - डॉ. राजीव उपाध्याय, प्राध्यापक, कुमाऊं विवि, नैनीताल।
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