तहसील मुख्यालय में जाति प्रमाणपत्र बनाने के लिए रुपए मांगने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने इसकी शिकायत उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर की है।
ग्राम दयारामपुर टांडा चिल्किया निवासी नीरज सिंह ने बताया कि उसने अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बनाने के लिए तहसील में प्रार्थनापत्र दिया। आरोप लगाया कि उस समय यहां तैनात तहसीलदार गौरव चटवाल एवं हल्का लेखपाल शिवस्वरूप ने प्रार्थनापत्र खारिज करने के साथ ही उसके चचेरे भाई-बहनों के जाति प्रमाणपत्र भी निरस्त कर दिए।
जब शिवस्वरूप प्रार्थी के घर जांच करने आए तो उसने प्रार्थी से सही रिपोर्ट लगवाने के एवज में 5 हजार रुपए देने की बात कही। नीरज ने बताया कि मामले की शिकायत उसने 16 फरवरी को मुख्यमंत्री, कुमाऊं आयुक्त एवं जिलाधिकारी को पत्र भेजकर दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, तहसीलदार ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा युवक के पास कोई भी ठोस पत्र नहीं थे, जिसके आधार पर उसके जाति प्रमाणपत्र बनाए जा सकते थे। युवक को समय भी दिया गया, लेकिन वह साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया।