दरअसल, अग्निशमन विभाग ने यूपी की तरह ही फायर एक्ट का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा था। हादसा होने पर अग्निशमन विभाग के अधिकारी सिर्फ जांच कर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजते हैं। इसके बाद जिला प्रशासन पर निर्भर है कि वह वह कार्रवाई करेगा या नहीं।
सीएफओ संजीवा कुमार ने बताया कि विधानसभा पटल पर फायर एक्ट रखा जाना था, लेकिन कुछ कारणों से नहीं रखा गया। उन्होंने बताया कि विभाग को जांच का अधिकार तो है पर कार्रवाई का नहीं। टेढ़ीपुलिया स्थित बेसमेंट में बने गोदाम और हिमालयन फार्म में आग बुझाने गई दमकल की टीम के पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे।
विभाग के पास तीन ड्रैगेन लाइट हैं, इसमें दो मरम्मत के लिए भेजी गई हैं। संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए विभाग के पास छोटी गाड़ी तक नहीं है। इसी प्रकार आग में घुसने के लिए फायर सेट और पर्याप्त हेलमेट तक नहीं है। घटनास्थल पर फायर फाइटर्स को कमी भी खलती है।
रेलवे की तरह ही बनाएंगे फायर सर्विस को
हल्द्वानी। केंद्र सरकार ने दिल्ली के विज्ञान भवन में 14 अप्रैल को देश के अग्निशमन अधिकारियों की बैठक बुलाई है। सीएफओ संजीवा कुमार बैठक में भाग लेने गए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार रेलवे की तरह ही फायर ब्रिगेड को भी बनाना चाहता है।