रामनगर। तराई पश्चिमी वनप्रभाग के हाथीडंगर क्षेत्र में पहली बार दुर्लभ नॉब-बिल्ड डक का एक जोड़ा देखा गया है। दुर्लभ जलपक्षी की मौजूदगी को यहां जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
वन कर्मियों ने गश्त के दौरान जलाशय में नॉब-बिल्ड डक के जोड़े को देखा। इसके बाद पक्षी की पहचान की पुष्टि की गई। बताया जा रहा है कि तराई पश्चिमी वन प्रभाग में इस प्रजाति के जोड़े का यह पहला दर्ज रिकॉर्ड है। नॉब-बिल्ड डक आमतौर पर शांत जलाशयों, दलदली क्षेत्रों और घने वन क्षेत्र से जुड़े जलस्रोतों में निवास करती है।
वनाधिकारियों के अनुसार अफ्रीका के जलाशयों से यह पक्षी यहां प्रवास पर पहुंचा है। नॉब-बिल्ड डक का वैज्ञानिक नाम सरकिडियोर्निस मेलानोटोस है। इसे भारत में नकटा नाम से भी पुकारा जाता है। यह प्रजाति अफ्रीका में कॉम्ब डक (कंघी बतख) के नाम से जानी जाती है।
नॉब-बिल्ड डक ग्रीष्मकालीन आवासीय पक्षी है जो अफ्रीका के जंगलों में पाया जाता है। तराई के जंगल में इस पक्षी की उपस्थिति पहली बार देखी गई है जो कि उत्साहजनक है। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। - प्रकाश चंद्र आर्या, डीएफओ, तराई पश्चिमी वनप्रभाग।