नैनीताल। हाईकोर्ट ने देहरादून के गुरु रामराय मेडिकल कालेज पर एक लाख का जुर्माना लगाते हुए वह धनराशि याचिकाकर्ता को देने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को पीजी कोर्स में अगले सत्र में प्रवेश देने और याची की ओर से जमा की जाने वाली फीस राज्य सरकार के खाते में जमा करने का निर्देश दिया है।
बुधवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी डा. अशिता अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसका चयन मेरिट के आधार पर गुरु रामराय मेडिकल कालेज में पीजी कोर्स (एमडी पैथोलॉजी) के लिए हुआ था।
प्रवेश कमेटी ने उनसे 31 मई 2016 को आठ लाख साठ हजार रुपए का ड्राफ्ट जमा करने को कहा। जब वह निर्धारित तिथि को ड्राफ्ट लेकर कालेज पहुंची तो उससे फीस लेने से इंकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता सरकार में मेडिकल आफिसर है और वह सरकार से एनओसी लाए।
याचिकाकर्ता की जगह डा. अनुकंपा राय को प्रवेश दे दिया गया। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने देहरादून के गुरु रामराय मेडिकल कालेज पर एक लाख का जुर्माना लगाते हुए वह धनराशि याचिकाकर्ता को देने के निर्देश दिए।
कोर्ट का आदेश यह भी है कि याची की ओर से जमा फीस राज्य सरकार के खाते में जमा की जाएगी और इस फीस का राज्य सरकार जनहित के लिए प्रयोग करेगी। कोर्ट ने यह भी आदेशित किया है कि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया कालेज में पीजी कोर्स के लिए एक अतिरिक्त सीट याचिकाकर्ता के लिए स्वीकृत करेगा और यदि याचिकाकर्ता उस कालेज में प्रवेश नहीं लेना चाहती तो वह सीट निरस्त मानी जाएगी।