सरकारी सिस्टम ने छठ महापर्व पर पूर्वांचल समाज की आस्था से किस तरह खिलवाड़ किया, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। लापरवाही का आलम यह रहा कि सोमवार को दोपहर बाद अचानक रामपुर रोड से गुजरने वाली नहर में कीचड़युक्त पानी छोड़ दिया गया। मजबूरी में हजारों व्रतियों को गंदे पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देना पड़ा। इससे सीधे तौर पर जिला प्रशासन से लेकर सिंचाई विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो रहा है।
सोमवार सुबह तक एसटीएच की ओर से आने वाली नहर में पानी साफ था, फिर अचानक से कीचड़भरा पानी आ गया। छठ पूजा समिति के कोषाध्यक्ष वीरू पंडित ने कहा कि जल संस्थान और सिंचाई विभाग ही जानें यह कैसे हुआ। सचिव सुरेश भगत ने कहा कि नहर में बरसात के सीजन की तरह मटमैला पानी बह रहा है। प्रशासन और सिंचाई विभाग ने आश्वासन दिया था कि नहर में पानी साफ रहेगा लेकिन देर शाम तक स्थिति वही रही। कपिल भगत ने कहा कि विभागों की लापरवाही का खामियाजा त्योहार पर लोगों का उठाना पड़ा है। ओम प्रकाश साह ने कहा कि गंदा पानी आने से श्रद्धालुओं को गंभीर परेशानी उठानी पड़ी है।
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क्या बोले अधिकारी
हर में दूषित पानी आने की शिकायत मिलने पर जांच कराई गई। कॉलटैक्स से पनचक्की और वर्कशॉप लाइन वाली नहर देखी तो उसमें साफ पानी चल रहा था। देर शाम पानी साफ हो गया था। मुखानी क्षेत्र में पूरी तरह अंडरग्राउंड नहर वाले क्षेत्र से दूषित पानी आने की आशंका है। पर्व को देखते हुए नहर में पानी कम खोला गया है, क्योंकि बरेली रोड क्षेत्र में निर्माण कार्य के चलते पानी घरों में घुस रहा है।