हाईकोर्ट ने गुरुकुल कांगड़ी मथुरा की ओर से 2007 में जारी परीक्षा प्रमाण पत्र को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल परीक्षा के समकक्ष माना है। इस आधार पर वन विभाग के फॉरेस्ट गार्ड की सेवा बर्खास्तगी करने का आदेश निरस्त कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई हुई। उत्तरकाशी निवासी धूरत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसका चयन 2009 में फॉरेस्ट गार्ड के पद पर दैनिक वेतन भोगी के रूप में हुआ था।
2013 में उसे विभागीय चयन के बाद स्थायी कर दिया गया, लेकिन प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत गुरुकुल कांगड़ी मथुरा की आधारिक परीक्षा का प्रमाण पत्र विभाग ने अमान्य घोषित कर दिया और उसकी सेवा समाप्त कर दी। विभाग के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
जिस पर हाईकोर्ट की एकलपीठ द्वारा आधारिक परीक्षा के संबंध अलग-अलग मत दिए। जिस पर मामले को खंडपीठ को रेफर किया गया था। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने गुरुकुल कांगड़ी मथुरा की ओर से 2007 में जारी आधारिक परीक्षा प्रमाण पत्र को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल परीक्षा के समकक्ष माना। इस आधार पर वन विभाग के फॉरेस्ट गार्ड की सेवा बर्खास्तगी करने का आदेश निरस्त कर दिया।