हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना के निर्माण स्थल पर चट्टान में आई दरार का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग ने चट्टान के ट्रीटमेंट के लिए बड़ा प्लान दिया है।
सूत्रों के अनुसार बांध की नींव वाली चट्टान में आई एक इंच की दरार करीब 20 मीटर दूरी तक फैली हुई है। इसकी रोकथाम के लिए अब 30 मीटर के दायरे में विशेष केबल एंकर लगाए जाएंगे। केंद्रीय जल आयोग के निर्देश पर 3-3 मीटर की दूरी पर 6 लाइन में कुल 125 केबल एंकर लगाने की योजना है।
बताया जा रहा है कि दरार की वास्तविक स्थिति जानने के लिए एक और जांच कराई जानी है। इस टेस्ट के बाद ही साफ होगा कि चट्टान के अंदर की स्थिति क्या है और आगे क्या कदम उठाने होंगे। बता दें कि कि बांध निर्माण के दौरान चट्टान में दरार दिखते ही काम रोक दिया गया था।
केंद्रीय जल आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार दरार के ट्रीटमेंट का काम किया जा रहा है। सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे का निर्माण कार्य तेज किया जाएगा। - बीबी पांडेय, उप महाप्रबंधक जमरानी बांध परियोजना इकाई।
विस्थापितों के रास्ते पर 12 करोड़ का रोड़ा
सिडकुल ने मांगा जमीन का पैसा, परियोजना में फंसा पेंच
हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना के विस्थापितों के पुनर्वास मामले में नया पेंच फंस गया है। ऊधमसिंह नगर स्थित प्राग फार्म में पुनर्वास स्थल तक जाने वाले रास्ते की 4.99 एकड़ जमीन पर सिडकुल ने अपना हक जता दिया है। सिडकुल प्रबंधन ने परियोजना इकाई को पत्र भेजकर कहा है कि उसने रास्ते की करीब 20 हजार वर्ग मीटर भूमि खरीदी है। सिडकुल ने वर्तमान सर्किल रेट (6000 रुपये प्रति वर्ग मीटर) के हिसाब से करीब 12 करोड़ रुपये की मांग की है।
जमरानी बांध निर्माण इकाई के परियोजना प्रबंधक हिमांशु पंत ने बताया कि परियोजना में रास्ते की जमीन खरीदने का कोई प्रावधान या बजट नहीं है। सिडकुल का पत्र शासन को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि सिडकुल के प्रपोजल में ही 60 मीटर सड़क का प्रावधान है अगर इस पर सहमति बनती है तो विस्थापितों को निशुल्क रास्ता मिल जाएगा। यह प्रस्ताव डीएम ऊधमसिंह नगर की अध्यक्षता में हुई बैठक में आया था। अब सहमति के लिए डीएम को भी पत्र भेजा जाएगा।