हल्द्वानी। सीओपीडी (क्रानिक आब्सट्रेक्टिव पल्मोनरी डिसीज) फेफड़ों की आम बीमारी है। सीओपीडी दुनिया में मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण है। जागरूकता और जानकारी के अभाव में रोग बढ़ रहा है।
मंगलवार को एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उक्त बात वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. नीलांबर भट्ट ने कही। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करने के साथ ही शिक्षण की आवश्यकता है। लोगों को तंबाकू, धूम्रपान और नशे से दूर रहना चाहिए। बायोमास ईंधन, धुएं और औद्योगिक प्रदूषण जैसे जोखिक के कारणों को टालना चाहिए। दमे और सीओपीडी के लक्षण एक जैसे होते हैं। रोग बढ़ने के बाद लोग डाक्टर के पास जाते हैं। सीओपीडी में लंग्स अटैक की आशका अधिक रहती है। लंग्स अटैक जानलेवा स्थिति है। सीओपीडी मधुमेह, हाइपरटेंशन, आस्टियोपोरोसिस और अवसाद से जुड़ी है। डॉ. भट्ट ने कहा कि स्पाइरोमीटर से फेफड़ों की क्षमता का परीक्षण कर मात्र छह सेकेंड के भीतर सीओपीडी का पता लगाया जा सकता है। डा.भट्ट ने कहा कि अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को मास्क जरूर पहनना चाहिए।
सिपला कंपनी के मयंक शर्मा, हरीश चौहान, अंकुश भारद्वाज ने स्पाइरोमीटर से जांच का तरीका बताया। सिपला सीओपीडी के परीक्षण को 19 से 21 नवंबर तक मुफ्त जांच करेगा। 20 नवंबर को बृजलाल हास्पिटल और 21 नवंबर को जगदंबा हार्ट केयर में परीक्षण होगा।
वर्ष 2020 तक होगी तीसरे नंबर की बीमारी
हल्द्वानी। सीओपीडी वर्ष 2020 तक विश्व में तीसरे नंबर की बीमारी होगी। इससे मरने वालों की संख्या भी अधिक होगी। अभी तक हार्ट अटैक, ब्लड शुगर और हाइपरटेंशन से मरने वालों की संख्या अधिक है। देश में एक करोड़ 40 लाख लोग सीओपीडी से ग्रस्त हैं। जबकि विश्व में 60 करोड़ लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। विश्व में लगभग 40 लाख लोगों की मौत सीओपीडी से होती है। अस्थमा लोगों में जेनेटिक कारणों से होता है। दादा, दादी या नाना, नानी को अस्थमा होने पर बच्चों में बीमारी आ सकती है। सीओपीडी 35 से 40 वर्ष के लोगों में होने की संभावना होती है। सीओपीडी का कई बार लोगों को पता नहीं चल पाता है। सांस फूलने या बलगम आने पर लोग ध्यान नहीं देते हैं।
शुगर के मरीजों के लिए है खतरनाक
हल्द्वानी। ब्लड शुगर के मरीजों के लिए सीओपीडी ज्यादा खतरनाक है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. नीलांबर भट्ट ने बताया कि ब्लड शुगर के मरीज को सीओपीडी होने पर लंग्स अटैक का खतरा ज्यादा रहता है। शुगर के मरीज को निमोनिया होने की संभावना भी अधिक होती है।
ये हैं लक्षण
= छाती फूल जाती है।
= जल्दी-जल्दी सांस लेना।
= सौ मीटर पैदल न चल पाना।
= सीढ़ी न चढ़ पाना।
= नहाने-कपड़े बदलने में परेशानी।
= लंबे समय से खांसी आना और बलगम आना।
इनसे बचें
= ज्यादा तनाव न लें।
= फूलों के पराग से दूर रहें।
= मौसम में बदलाव के दौरान रहे सचेत।
= पालतू पशुओं से दूर रहें।
= धूल और धूएं से रहें।
= अत्याधिक तेल या चिकनाई युक्त भोजन।
= परफ्यूम या बाडी स्प्रे की खुशबू।