हल्द्वानी। जिला खनन समिति भले एक नवंबर को गौला खनन कराने का मंसूबा बांधे हो। वन निगम एमडी तैयारियों को लेकर दौरा और मीटिंग करें, पर जो हालात हैं उसमें नियत समय पर खनन शुरू होने के आसार कम ही हैं। वन निगम के वाहनों के रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण के तहत अभी फार्म ही बंट रहे हैं। इसके अलावा स्टोन क्रशर के लिए बार-बार ट्रांजिट फीस को लेकर भी अंदरखाने की खलबली मची है। वह इस मामले में ‘न्यायिक हल’ की तलाश में है।
गौला में एक नवंबर से खनन शुरू की योजना है, पर इसके लिए जो तैयारी वन निगम स्तर से होनी चाहिए, उसमें पूरी तरह तेजी नजर नहीं आ रही है। खनन में करीब 6500 डंपर और ट्रैक्टर-ट्राली खनन करते हैं। नियमानुसार हर साल वाहन स्वामियों को इसका रजिस्ट्रेशन वन निगम में करना होता है, इसमें वाहनों के कागजात, ड्राइवरों के लाइसेंस प्रपत्र आदि जमा कर आरटीओ विभाग से सत्यापन करना होता है, जिसके बाद ही उन्हें खनन की अनुमति दी जाती है, पर अब तक इसमें केवल रजिस्ट्रेशन के लिए फार्म ही बांटने की प्रक्रिया शुरू हो पाई है। इसके अलावा खनन गेटों पर निगम के कर्मी जहां पर बैठते हैं, वहां के आफिस भी पूरी तरह तैयार नहीं हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार गौला से निकलने वाले खनिज के सबसे बड़े खरीददार कई स्टोन क्रशर भी पूरी तरह तैयार नहीं है। उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत ट्रांजिट फीस को लकर है। कोर्ट के आदेश पर वन विभाग प्रति क्विंटल 5 रुपए वसूलता है। ऐसे में एक डंपर पर करीब 450 रुपए ट्रांजिट फीस देनी पड़ती है, स्टोन क्रशर से भी माल बेचने पर यह राशि चुकानी पड़ती है। कई स्टोन क्रशर के कथित तौर पर बार-बार ट्रांजिट फीस को लेकर समस्या है, वह इसमें राहत के लिए कोर्ट से ही कोई मदद मिलने की आस लगाए हैं। ऐसे में खनन का काम एक पखवाड़े तक लटक सकता है। वन निगम डीएलएम दिवाकर बिष्ट का कहना है कि रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। बाकी तैयारियों को जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
टैक्स बचाने को अगले महीने का इंतजार
डंपर स्वामी टैक्स बचाने को वाहन सरेंडर कर देते हैं। सरेंडर अवधि में उन्हें टैक्स नहीं पड़ता है। ऐसे में वह अगर अक्तूबर में एक दिन के लिए वाहन बाहर निकालते हैं, तो पूरे महीने का टैक्स देना पड़ेगा। ऐसे में वाहन स्वामी अगले महीने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे टैक्स की बचत हो जाए और तब तक तैयारी भी पूरी हो जाएगी। आरटीओ विभाग को इन वाहनों से नवंबर के महीने में टैक्स मिलने की आस है।