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मौत के मुहाने पर दस परिवार

Wed, 11 Jun 2014 05:33 AM IST
Nainital
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भीमताल। हिमाचल में मंडी जिले के लारजी डैम से अचानक छोड़े गए पानी में इंजीनियरिंग के 24 छात्रों के बहने की खबर ने यहां डैम की तलहटी पर रह रहे नगर पंचायत के सफाई कर्मियों की नींद उड़ा दी है। हालांकि इस डैम से सूचना दिए बिना इतनी अधिक मात्रा में पानी नहीं छोड़ा जाता, लेकिन बरसात में झील के लबालब होने पर अनहोनी की आशंका से लोगों में दहशत है। बताते चलें कि झील से सटे डैम से करीब 250 मीटर की दूरी पर नीचे की ओर नगर पंचायत के सफाई कर्मियों के दस परिवार रहते हैं। जिस स्थान पर इनके मकान हैं उससे सटे हुए गधेरे से ही झील का पानी तराई-भाबर को बहता है। जब अधिक पानी की निकासी होती है तो झील का पानी मकानों के आंगन तक पहुंच जाता है। बरसात शुरू होते ही इनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि वर्ष 1880 में बनाया गया डैम अपनी 100 साल की मियाद पूरी कर चुका है। वर्तमान में डैम में कई स्थानों पर दरारें आ चुकी हैं। बरसात में इन दरारों से भी झील का पानी रिसता रहता है। डैम का एक स्कैब गेट (ताश) वर्षों से खराब है। डैम की खराब स्थिति को देखते हुए सिंचाई विभाग की ओर से बरसात में झील में केवल 44 फुट पानी ही भरा जाता है। इससे अधिक पानी होने पर डैम में बनी बरसातियों (ताश) को खोलकर पानी की निकासी कर दी जाती है। ताश से निकला पानी पूरे वेग के साथ नीचे की ओर सीधे सफाई कर्मियों के मकानों के करीब तक जा पहुंचता है। ऐसे में हर साल नगर पंचायत डैम की तलहटी में रहने वाले सफाई कर्मियों को बरसात में अन्यत्र शिफ्ट करा देती है। यहां रह रहे सफाई कर्मी रामनिवास, सीता, लीले राम और सत्ते आदि का कहना है कि पिछले कई साल से वह सफाई कर्मियों को स्थायी रूप से अन्यत्र बसाने की मांग कर रहे हैं लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हुई। कागजों में 50 क्यूसेक, हकीकत में पता नहींभीमताल। सिंचाई विभाग की ओर से गर्मियों में तराई-भाबर के लिए झील से पानी की निकासी होती है। कागजों में तो झील से रोजाना 50 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है लेकिन जिस स्थान से पानी छोड़ा जाता है वहां पर विभाग के पास कोई भी ऐसा पैमाना नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि वास्तव में 24 घंटे में झील से कितने पानी की निकासी हो रही है। इस साल 15 मई को जब पानी छोड़ा गया तब झील का जलस्तर 39.6 फुट था जबकि सोमवार को झील का जल स्तर 28.8 फुट रह गया था। यानि 25 दिन में 10.8 फुट पानी कम हो गया। अभी फिलहाल सिंचाई खंड हल्द्वानी ने 15 जून तक प्रतिदिन 50 क्यूसेक पानी की मांग की है। यानी छह दिनों में 300 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा।
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