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रजिस्ट्रेशन तीन का ,चल रहे 30 से ज्यादा

Fri, 11 Jan 2013 05:30 AM IST
Nainital
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हल्द्वानी। राज्य में केवल तीन नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र समाज कल्याण विभाग में पंजीकृत हैं। जबकि इस समय 13 जनपदों में 30 से ज्यादा नशामुक्ति केंद्र अवैध रूप से चल रहेें हैं। जिनमें 08 से ज्यादा तो अकेले राजधानी देहरादून में हैं। जिनमें मोटी फीस लेकर नशा मुक्ति की तो गारंटी ली जाती है, लेकिन मौत की नहीं। मगर न तो स्थानीय प्रशासन और ना ही समाज कल्याण विभाग क ी ओर से इनकेखिलाफ आज तक कार्रवाई की गई। हैरानी की बात तो ये है कि रजिस्टर्ड केंद्रों में विभाग की ओर से लंबे समय से चेकिंग नहीं की गई।
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समाज कल्याण विभाग की ओर से हल्द्वानी, हरिद्वार और बागेश्वर में तीन नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्र रजिस्टर्ड किए गए हैं। जिनमें लोगों को नशा छुड़वाने और आम जीवन जीने के लिए ट्रीटमेंट दिया जाता है। इसकेलिए विभाग की ओर से ही मानक तय किए गए हैं। लेकिन इसके अलावा भी राज्य भर में 30 से ज्यादा नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र चल रहे हैं। जिनमें से 14 से ज्यादा हरिद्वार और दून में चल रहे हैं। अन्य जनपदों में भी इसी तरह बिना रजिस्ट्रेशन के ऐसे केंद्र चलाए जा रहे हैं। लेकिन आज तक एक के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की गई।

कइयों की हो चुकी मौत
जबकि आए दिन नशामुक्ति केंद्र में इलाज कर रहे युवाओं की संदिग्ध मौत की सूचनाएं आती रहती हैं। पिछले साल ही हरिद्वार और दून में 08 लोगों की मौत नशा मुक्ति केंद्र में हुई। जिनमें से 05 के परिजनों ने पुलिस से भी मामलों की शिकायत की थी। कई युवा तो वहां से मौका पाकर भाग भी निकलते हैं। यही नहीं रजिस्टर्ड केंद्रों में भी मानकों की जांच लंबे समय से नहीं की गई।
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फार्म में लिखा है मौत के जिम्मेदार नहीं
इन नशा मुक्ति केंद्रों में 5000 से 1000 तक की मोटी फीस एक एक मरीज से ली जाती है। लेकिन भर्ती करते वक्त की उसकी मौत की गारंटी नहीं ली जाती। इनके एडमिशन फॉर्म में साफ लिखा होता है कि मौत के लिए केंद्र जिम्मेदार नहीं होगा। यही नहीं एडमिशन फॉर्म ज्यादातर अंग्रेजी में होता है और केंद्र के अंदर ही भरवाया जाता है।


जांच कराई जाएगी
राज्य में तीन ही नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र विभाग की ओर से रजिस्टर्ड हैं। जिनके लिए विभाग ने मानक भी तय किए हैं। इसके अलावा चलने वाले सभी केंद्र अवैध हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारियों केमाध्यम से इनकी जांच करवाई जाएगी। आरपी पंत, विशेष कार्याधिकारी, समाज कल्याण निदेशालय
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