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पोंटी और हरदीप की मौत से हिली चड्डा साम्राज्य की नींव

Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
Nainital
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हल्द्वानी। चड्ढा ग्रुप में प्रापर्टी बंटवारे को लेकर हुए आपसी विवाद में गुरदीप सिंह चड्ढा उर्फ पोंटी और उनके छोटे भाई हरदीप सिंह चड्ढा की मौत के बाद चड्डा ग्रुप से जुड़े कारोबारियों में हड़कंप मचा है। चड्ढा ग्रुप के कारोबार में कई सफेदपोश नेताओं और अफसरों का भी पैसा लगा है। वर्तमान में उत्तराखंड में शराब कारोबार पर पचास फीसदी चड्ढा ग्रुप का कब्जा है। कुमाऊं में 324 शराब की दुकानों में 65 दुकानें और सात बार चड्ढा ग्रुप से जुड़े सिंडिकेट की हैं। शराब कारोबार के अलावा उत्तराखंड में चड्ढा ग्रुप की अरबों रुपये की संपत्ति है।
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नैनीताल जिले के पीरूमदारा (रामनगर) में रहने वाले कुलवंत सिंह चड्ढा ने 70 के दशक में शराब के ठेके लेकर कारोबार शुरू किया। अस्सी के दशक में उत्तराखंड की नदियों में खनन के ठेके भी लेकर उन्होंने चड्ढा ग्रुप के साम्राज्य की नींव रखी। देखते ही देखते चड्ढा ग्रुप का शराब कारोबार के साथ कंस्ट्रक्शन और दूसरे कारोबार में भी दखल हो गया। दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की करते हुए चड्ढा ग्रुप ने देश ही नहीं विदेशों में अपना कारोबार फैला लिया। वर्ष 1989 में चड्ढा ग्रुप ने हल्द्वानी के प्रमुख व्यवसायी अब्दुल मलिक के साथ गौला खनन के लिए हाथ मिलाया। दोनों पार्टनरों ने वर्ष 1991 में पोंटी एंड मलिक कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाई। कंपनी में दोनों की आधे-आधे की पार्टनरशिप हो गई। खनन में जबर्दस्त मुनाफा होने पर पोंटी एंड मलिक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने वर्ष 1992 में उत्तराखंड की सभी नदियों से खनन के ठेके हासिल कर लिए। वर्ष 2002 में पार्टनरशिप खत्म हो गई। 2006 में पोंटी एंड मलिक कंस्ट्रक्शन कंपनी बंद होने पर सभी शेयर अब्दुल मलिक ने खरीद लिए।
राज्य बनने से पहले उत्तराखंड में शराब कारोबार पर पूरी तरह कुलवंत सिंह चड्ढा ग्रुप का कब्जा था। वर्ष 2002 से शराब की दुकानों का लाटरी सिस्टम से आवंटन होने के बाद इस कारोबार में दूसरे लोगों ने भी हाथ आजमाया। इसके बावजूद शराब कारोबार में चड्ढा ग्रुप की हिस्सेदारी कम नहीं हुई। चड्ढा ग्रुप ने दूसरे शराब व्यवसायियों को अपने ग्रुप के साथ जोड़कर सिंडिकेट में शामिल कर दिया। इससे चड्ढा ग्रुप की स्थिति फिर मजबूत हो गई। उत्तराखंड में अभी शराब कारोबार में विजयंत जायसवाल चड्ढा ग्रुप के पार्टनर हैं।
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कुमाऊं में चड्ढा ग्रुप से जुड़ी शराब की दुकानें
जिला चड्ढा सिंडिकेट कुल दुकानें
नैनीताल 15 61
ऊधमसिंह नगर 24 90
अल्मोड़ा 08 40
बागेश्वर 05 09
चंपावत 05 09
पिथौरागढ़ 08 25
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65 234

बार और दुकानें हुई बंद
चड्ढा ग्रुप के कुमाऊं में सात बार हैं। इनमें दो बार हल्द्वानी, दो बार रामनगर और तीन बार ऊधमसिंह नगर में चलते हैं। पोंटी और हरदीप सिंह की मौत की खबर आते ही अधिकतर बार एवं दुकानें बंद हो गई। कुलवंत चड्ढा की रामनगर में ससुराल है। हल्द्वानी में भी उनके कई रिश्तेदार हैं। पोंटी और हरदीप की मौत की खबर सुनकर रामनगर और हल्द्वानी से उनके रिश्तेदार दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

हरदीप के कारनामों से तनाव में था पोंटी : अब्दुल मलिक
हल्द्वानी। चड्डा ग्रुप के साथ लंबे समय तक कंस्ट्रक्शन कारोबार में पार्टनर रहे व्यवसायी अब्दुल मलिक के मुताबिक पोंटी चड्ढा पिछले कुछ महीनों से काफी परेशान था। परेशानी की वजह संपत्ति का बंटवारा था। श्री मलिक बताते हैं कि पोंटी से उनका नजदीकी याराना था। करीब डेढ़ महीने पहले ही फोन पर पोंटी से उनकी लंबी बातचीत भी हुई थी। पोंटी अपने भाई हरदीप की हरकतों को लेकर काफी परेशान था। पोंटी ने उन्हें बताया कि हरदीप के कहने पर चड्ढा ग्रुप की संपत्ति का तीन बार बंटवारा हो चुका है। हरदीप फिर से बंटवारा चाहता था, जिसको लेकर पोंटी मानसिक तनाव से गुजर रहा था। पोंटी की मौत से अब्दुल मलिक बेहद दु:खी है। वह कहते हैं कि उन्होंने अपना सच्चा दोस्त खो दिया।
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