नैनीताल। कहते हैं जिस बंदे पर खुदा की रहमत होती है वह जीवन की बढ़ी से बढ़ी कठिनाइयों का भी आसानी से सामना कर लेता है। अब्दुल रहमान भी खुदा के उन बंदों में से एक हैं। उम्र के 73वें पड़ाव में पहुंचने के बाद अब्दुल रहमान के भीतर आज भी समाजसेवा को लेकर गजब का जोश और जज्बा है। बीते 44 वर्ष बीडी पांडे अस्पताल में बतौर चतुर्थ कर्मचारी अपनी सेवाएं दे चुके रहमान को शरीर की टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने में महारथ हासिल है और अब तक ऐसे न जाने कितने मरीजों का वह इलाज कर चुके हैं।
वर्तमान में शहर समेत पिथौरागढ़, बागेश्वर आदि दूरदराज इलाकों के लोग बड़े अस्पतालों में महंगी फीस भरने के बजाए एक्सपर्ट रहमान के पास आकर अपना इलाज कराते हैं। वहीं गरीबों के लिए रहमान मसीहा से कम नहीं हैं। मल्लीताल निवासी अब्दुल रहमान बताते हैं कि छोटी उम्र में पिता के इंतकाल और आर्थिक तंगी के बीच परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई। इस कारण वह 8वीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर पाए। 1955 में उन्होंने भवाली सैनिटोरियम में चतुर्थ कर्मचारी के तौर पर काम किया। दो साल बाद वह नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल आए। तब से 44 वर्ष तक अस्पताल में चिकित्सकों को मरीजों का इलाज करते देख आज वह मरीजों की टूटी हड्डियां जोड़कर बड़े-बड़े डाक्टरों को मात दे रहे हैं।
रहमान बताते हैं कि उन्होंने आर्थोपेडिक विभाग में सिविल सर्जन डा. एचएन बहादुर और डा. बीसी जोशी के नेतृत्व में काम सीखा। वर्ष 2000 में वह सेवानिवृत्त हो गए और उसके बाद उन्होंने दूरदराज क्षेत्रों के मरीजों का नि:शुल्क इलाज करने के लिए मल्लीताल बाजार में ही एक दुकान ले रखी है। बच्चे-बुर्जुगों के शरीर की टूटी हड्डियों को जोड़ने के अतिरिक्त वह पैदाइशी बीमारी टेलीपिस (जिसमें पैर अंदर की तरफ मुड़े होते हैं) का इलाज करते हैं। उन्होंने टेलीपिस से ग्रस्त कई बच्चों के पैरों को सीधा किया है।
शहर की सफाई की दुआ मांगी
नैनीताल। अब्दुल रहमान शुक्रवार को को हज यात्रा पूरी कर अपने घर पहुंचे। यात्रा के दौरान उन्होंने शहर में चारों तरफ साफ-सफाई बरकरार रहने की दुआ मांगी। उन्होंने कहा कि वह आगे भी मरीजों का इलाज कर समाजसेवा करेंगे। श्री रहमान बीते 27 अक्तूबर को हज यात्रा पर निकले थे।