रामनगर। कार्बेट टाइगर रिजर्व में आने वाले पर्यटकों के लिए अब कार्बेट नेशनल पार्क में दो रात बिताना जरूरी होगा जबकि वहां एक वन परिसर में अधिकतम तीन रात तक ठहरने की अनुमति मिलती है। अब समय, पैसे की कमी के कारण कई वन्यजीव प्रेमियों को मायूसी का सामना करना पड़ सकता है।
सीटीआर के निदेशक आरके मिश्रा ने बताया कि चंद घंटे के एक दिवसीय भ्रमण से पर्यटक खुश नहीं होते। अब व्यस्त दिनचर्या वाले पर्यटकों से जिप्सी, खुले कैंटर में घूमने को कहा जा रहा है जबकि वन विश्राम भवनों में न्यूनतम दो और अधिकतम तीन रात ठहरने की नीतियों को बढ़ाया दिया जा रहा है। वहीं सीटीआर में सबसे सस्ती आवासीय सुविधा वाली डोरमैट्री सिर्फ विद्यार्थियों के लिए सुलभ की गई है। वहां एक दिन ठहरने, घूमने का प्रति व्यक्ति औसत खर्च कई हजार तक पहुंचता है। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन जागरूकता के लिए बने इस राष्ट्रीय उद्यान में ठहरने से आम पर्यटक वंचित हो जाएगा। पार्क भ्रमण के दौरान एक युगल को प्रति रात्रि विश्राम के लिए कमरे का न्यूनतम किराया 1500 रुपये है। प्रवेश शुल्क 200 रुपये प्रति व्यक्ति, 500 रुपये रोड टैक्स, 3500 रुपये जिप्सी किराया, 600 रुपये गाइड फीस प्रतिदिन समेत महंगा खाना अलग से देय होता है। अब दो दिन तक ठहरने की अनिवार्यता से दोगुना खर्च वहन करना आम पर्यटक से दूर हो चला है। जिससे वन्यजीव संरक्षण के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियान से आम आदमी दूर होता चला जाएगा और वन्यजीवों के दुर्लभ संसार को देख, समझ पाना उसके लिए मुश्किल होगा।