हल्द्वानी। 108 एंबुलेंस के संचालन से लोगों को भले ही परेशानी हो रही है और स्वास्थ्य महकमे से लेकर कंपनी पर इसका कोई असर नहीं दिखा रहा है। वहीं, खराब पड़ी एक एंबुलेंस को महिला अस्पताल के पीछे लाकर खड़ा कर दिया गया, जबकि इंश्योरेंश खत्म होने के बाद एक अन्य एंबुलेंस का इंश्योरेंस नहीं कराया गया है।
सूत्रों की मानें तो हल्द्वानी कोतवाली के बाहर दस अप्रैल से 108 एंबुलेंस खड़ी है। इसका इंश्योरेंस खत्म हो चुका है। हल्द्वानी के लिए चलने वाली उक्त एंबुलेंस के छह कर्मियों को कंपनी की ओर से अवकाश दे दिया गया, जबकि रामगढ़ की खराब एंबुलेंस को ठीक नहीं कराया गया। इसी प्रकार महिला अस्पताल में तीन खुशियों की सवारी भी खड़ी हैं। 31 अप्रैल को जीवीके ईएमआरआई कंपनी का करार एंबुलेंस के संचालन को लेकर खत्म हो रहा है। ऐसे में इंश्योरेंश और मरम्मत को लेकर कंपनी के अधिकारियों ने कोई तवज्जो नहीं दी। जिले में तीन-चार अन्य एंबुलेंस भी खराब हैं। जीवीके ईएमआरआई में कार्यरत कर्मियों को दो माह का वेतन भी नहीं मिला है। इस संबंध में कंपनी के राज्य प्रमुख मनीष टिंक्कू का कहना है कि मार्च और अप्रैल का भुगतान नहीं हुआ है। इस कारण इंश्योरेंश नहीं कराया गया। साथ ही मरम्मत इसलिए नहीं कराई गई, क्योंकि अब नई एंबुलेंस आ जाएंगी। टिंक्कू ने कहा कि शासन से दो करोड़ रुपये लेने हैं। बताया कि कर्मियों का वेतन अगले सप्ताह दिया जाएगा, जबकि बाजार में भी एक करोड़ की उधारी है।
दस अप्रैल के बाद न इंश्योरेंस कराया, न एंबुलेंस की मरम्मत कराई
खराब पड़ी एंबुलेंस महिला के पीछे खड़ी की
छह कर्मियों को भेजा अवकाश पर, 31 को करार खत्म होने के कारण हीलाहवाली
खटीमा से गर्भवती को दो हजार रुपये देकर एसटीएच लाए
हल्द्वानी। 108 एंबुलेंस और खुशियों की सवारी का संचालन बाधित होने से मरीजों को सर्वाधिक परेशानी हो रही है। खटीमा से एक गर्भवती को अस्पताल लाने के लिए परिजनों को दो हजार रुपये खर्च करने पड़े। गर्भवती दो घंटे तक 108 एंबुलेंस के इंतजार में कराहती रही। फील्ड कर्मियों के हड़ताल पर होने से 108 एंबुलेंस और खुशियों की सवारी की सेवाएं 23 अप्रैल से बाधित हैं। सामान्य दिनों में कुमाऊं में 108 एंबुलेंस के लिए 150 से 160 कॉल (देहरादून कॉल सेंटर) में जाती थीं, मगर 23 अप्रैल से कॉल की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है और अब महज 70 से 80 कॉल जा रही है। वहीं, महिला अस्पताल से प्रसव के बाद पिथौरागढ़ गई महिला के परिजनों को भी चार से पांच हजार रुपये वाहन के चुकाने पड़े।
पिथौरागढ़ जाने के लिए चुकानी पड़ी अधिक कीमत
70 से 80 कॉल आ रही प्रतिदिन, सामान्य दिनों में 160 तक प्रतिदिन कुमाऊं से 108 के लिए काल सेंटर पर जाती थी काल
झनकट खटीमा निवासी कमलेश शुक्रवार को प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। 108 एंबुलेंस को फोन किया गया, मगर कोई जवाब नहीं मिला। महिला दो घंटे तक तड़पती रही। महिला के पति भगत सिंह अपने पड़ोसी के सहयोग से दो हजार रुपये खर्च कर निजी टैक्सी से एसटीएच लेकर पहुंचा।
पिथौरागढ़ निवासी दीपिका पांडे को प्रसव पीड़ा होने पर पिथौरागढ़ से 25 अप्रैल को महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को महिला अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उसे खुशियों की सवारी नहीं मिली। परिजन अपने खर्चे से टैक्सी करके घर ले गए।
ओखलकांडा निवासी दीपा देवी को प्रसव पीड़ा होने पर 24 अप्रैल को महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को उसे डिस्चार्ज किया गया। खुशियों की सवारी न मिलने के कारण परिजन निजी वाहन से घर लेकर गए।