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नवंबर में ही खिल गया पहाड़ के पसंदीदा हिसालु का फूल

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tree in shimla
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हल्द्वानी। पहाड़ का पसंदीदा फल हिसालु का फूल नवंबर के पहले हफ्ते में ही खिल गया। इसका फूल जनवरी-फरवरी में खिलता है। हिसालु के फूल खिलने के चक्र में हुए बदलाव को ग्लोबल वार्मिंग और पहाड़ में बढ़ रहा प्रदूषण वजह माना जा रहा है। फिलहाल हिसालु के बदले हुए चक्र पर वन अनुसंधान ने शोध शुरू कर दिया है।
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पहाड़ में 1500-2500 की ऊंचाई पर हिसालु का फल मिलता है। हिसालु का वनस्पति नाम रूबस इलीप्टिस है। झाड़ीनुमा इस प्रजाति के पौधे का फूल आमतौर पर जनवरी के चौथे और फरवरी के पहले हफ्ते में खिलता है। अप्रैल-मई में फल पक जाता है। ग्लोबल वार्मिंग की लगातार बढ़ रही तपिश से पहाड़ की वनस्पतियों के जीवन चक्र में बदलाव होने लगा है। माना जा रहा है कि इससे हिसालु के फूल खिलने के समय में भी बदलाव हुआ है। इस बदलाव को वन अनुसंधान चिंतित है। वन अनुसंधान ने हिसालु के फूल, फलीकरण और फलों के गुणों में होने वाले परिवर्तनों पर अध्ययन शुरू कर दिया है। ज्योलीकोट और रानीखेत की नर्सरी में परिवर्तन का असर देखा जा रहा है।
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नवंबर में ही खिल गया पहाड़ के पसंदीदा हिसालु का फूल
जनवरी-फरवरी में आता है इस का फूल, अप्रैल-मई पक जाता है
वन अनुसंधान ने शुरू किया शोध

ये हैं हिसालु के फायदे
- बवासीर की गंभीर बीमारी में फल और इसकी जड़ का सेवन करने से लाभ मिलता है।
- हिसालु मृदा क्षरण रोकने में बहुत उपयोगी है।
- चिड़िया, बंदर, लंगूर भी खाते हैं इसलिए जैव विविधता में भी महत्वपूर्ण है।


हिसालु के फूल समय से पहले नवंबर में ही खिल गए हैं। यह चिंता का विषय है इसको लेकर एक शोध शुरू किया है इसमें हिसालु के फल पकने तक पर अध्ययन हो रहा है।
-मदन सिंह बिष्ट, प्रभारी रेंजर वन अनुसंधान
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