हल्द्वानी। तराई की जीवन रेखा मानी जाने वाली जमरानी बांध परियोजना को लेकर सिंचाई विभाग की कोशिशें जारी हैं। जमरानी बांध की नई डीपीआर केंद्र सरकार की स्टीयरिंग कमेटी को पहले ही भेजी जा चुकी है। स्टीयरिंग कमेटी की 15 मार्च को इस मामले में होने वाली बैठक स्थगित होने के बावजूद बांध निर्माण की प्रक्रिया को लेकर कोशिशें जारी हैं। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता बांध से संबंधित वित्तीय मामलों पर परामर्श के लिए मंगलवार को दिल्ली रवाना होंगे।
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता एलके शर्मा ने बताया कि जमरानी बांध को लेकर उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड सरकार के बीच करार होने के बाद बांध की 2850 रुपये की नई डीपीआर केंद्र सरकार को पहले ही भेजी जा चुकी है। उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश सरकार में बांध को राष्ट्रीय परियोजना कराने के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया है। राष्ट्रीय परियोजना में शामिल करने के संबंध में 15 मार्च को केंद्रीय स्टीयरिंग कमेटी की बैठक होनी थी लेकिन वह स्थगित हो गई थी। अब स्टीयरिंग कमेटी की बैठक से पहले बांध परियोजना के वित्तीय मामले को लेकर केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित है। जिसमें विचार विमर्श के लिए वह मंगलवार को दिल्ली रवाना हो रहे हैं। जमरानी बांध परियोजना का मामला 43 साल से चल रहा है। 1975 में बांध परियोजना के लिए 60.25 रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति के बाद गौला बैराज, जमरानी सिंचाई कॉलोनी, नहरों का निर्माण किया गया लेकिन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की तमाम आपत्तियों के कारण बांध परियोजना को स्वीकृति नहीं मिल पाई थी। पिछले साल नवंबर में जल बंटवारे पर उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड के प्रमुख सचिवों के बीच एमओयू होने के बाद जमरानी बांध के स्वीकृत होने के आसार बढ़ गए हैं। एमओयू के मुताबिक बांध से उत्तरप्रदेश को 57 फीसदी, उत्तराखंड को 43 फीसदी पानी देने पर सहमति हुई है। प्रस्तावित बांध से 100 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य भी है।
मुख्य अभियंता मंगलवार को होंगे दिल्ली रवाना
बांध के वित्तीय मामलों को लेकर केंद्र सरकार से होगा विचार विमर्श