रानीखेत (अल्मोड़ा)। उमेश डोभाल स्मृति समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पूर्व राजदूत चंद्र मोहन भंडारी ने कहा कि देवभूमि के संरक्षण के लिए प्रदेश को आध्यात्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए भी सरकार को ठोस नीतियां बनानी होंगी। वक्ताओं ने जन आंदोलनों की रूपरेखा पर चर्चा की। जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए सभी से एकजुट होकर आगे आने का आह्वान किया गया।
यहां एक होटल में आयोजित समारोह में विभिन्न राज्यों से पत्रकार पहुंचे थे। सुबह दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ। उत्तराखंड के ज्वलंत सवाल विषय पर डॉ. विपिन शाह ने बोली के संरक्षण पर जोर दिया। पत्रकार चारू तिवारी ने उत्तराखंड के आंदोलनों पर चर्चा की। जल, जंगल, जमीनों के संरक्षण के लिए वृहद जन आंदोलन की जरूरत पर भी चर्चा हुई। पद्म श्री शेखर पाठक ने कहा कि जन आंदोलनों से ही समाज आगे बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि पहाड़ के लोग अपनी जमीन को बेचकर मैदानी क्षेत्रों में बस रहे हैं जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने युवा पत्रकारों से दिवंगत पत्रकार उमेश डोभाल के जीवन चरित्र से सीख लेने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि पूर्व राजदूत सीएम भंडारी ने देवभूमि के लोगों को कर्मठ बताया।
ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंद पंत राजू ने सभी का आभार जताया। इससे पहले रंगकर्मी भुवन शाह ने दिवंगत चित्रकार बी मोहन नेगी की कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन शाह सहित पत्रकारिता जगत से जुड़े तमाम पत्रकार मौजूद रहे। संचालन पत्रकार विमल सती ने किया। इस दौरान उमेश डोभाल एक धारा थी, एक धारा है पुस्तक का विमोचन भी हुआ।