भागीरथी गधेरे में में फेंका गया कूड़ा।
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हल्द्वानी। शहर और ग्रामीण इलाकों से गुजरने वाली सिंचाई नहरें कूड़े से अटी पड़ी हैं। नहरों का कूड़ा खेतों की उर्वरा शक्ति को खत्म कर रहा है। तमाम जनप्रतिनिधियों ने कूड़े से निजात दिलाने के लिए सभी खुली नहरों को कवर करने की मांग उठाई है। जिला प्रशासन ने सिंचाई विभाग से खुली नहरों को कवर किए जाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।
गौलापार इलाके में गेहूं, धान, गन्ने समेत प्रचुर मात्रा में फल, सब्जी का उत्पादन होता है। लामाचौड़ क्षेत्र का टमाटर विदेशों तक जाता है। लामाचौड़, प्रेमपुर लोशज्ञानी, हल्दूचौड़, मोटाहल्दू, तीनपानी, लालकुआं आदि इलाकों में भी काफी मात्रा में खेती होती है। इन सभी इलाकों की सिंचाई गौला नदी से निकलने वाली गौलावार, गौलापार मुख्य फीडर नहर से होती है। इन इलाकों को गुजरने वाली अधिकांश नहरें शहर के बीचोंबीच होकर जाती हैं। खुली नहरें होने से इनसे काफी अधिक कूड़ा काश्तकारों के खेतों में चला जाता है। खेतों में कूड़ा जाने से खेतों की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और किसानों ने खुली नहरों को कवर करने की मांग की है। गौलापार क्षेत्र के प्रधान तारा सिंह बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य प्रकाश गजरौला, प्रधान बलजीत सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य जगदीश नौला, किसान बालम सिंह बिष्ट आदि ने डीएम से नहरों को कवर करने की मांग की है। इधर, सिंचाई विभाग के ईई आनंद सिंह बिष्ट का कहना है कि नैनीताल रोड समानांतर नहर, सुशीला तिवारी अस्पताल से तीनपानी, छड़ायल नहर को कवर करने के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। ग्रामीण इलाकों की नहरों से किनारे कुलावे होने से उन्हें कवर नहीं किया जा सकता है। मुख्य नहरों को कवर करने का प्रस्ताव है।