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कोसी की 84 प्रतिशत सहायक नदियां सूखी

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रामनगर में राइका क्यारी में आयोजित कार्यशाला में जानकारी देते प्रोफेसर। अमर उजाला - फोटो : RAMNAGAR
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रामनगर (नैनीताल)। रामनगर और अल्मोड़ा की लाइफलाइन मानी जाने वाली कोसी नदी की 84 प्रतिशत सहायक नदियां सूख चुकी और दस प्रतिशत सूखने की कगार पर हैं। ऐसे में नदी को बचाने के लिए प्रयास करने होंगे। राजकीय इंटर कॉलेज क्यारी में प्रदेश सरकार से पोषित एवं कुमाऊं विवि के प्रो.जेएस रावत ने कोसी पुनर्जनन अभियान पर एक दिनी कार्यशाला का आयोजन किया, इसमें अभियान का महत्व समझाया गया।
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मुख्य आयोजक डॉ.प्रदीप रावत ने विभिन्न विद्यालयों से आए विद्यार्थियों, अभिभावकों, स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्यों को प्रोजक्टर के माध्यम से व्याख्यान दिया। बताया कि कोसी नदी में कुछ दशक पहले तक अपने उद्गम स्थल कौसानी से रामनगर तक छोटी-बढ़ी लगभग चौदह हजार सहायक नदियों का जल मिलकर वर्षभर बहता था, लेकिन आज मानवजनित जलवायु परिवर्तन, जंगलों की आग, अनियोजित शहरीकरण और विकास के नाम पर जल जंगल जमीन का अंधाधुंध शोषण होने से जीवनदायिनी कोसी नदी की 84 प्रतिशत सहायक नदियां सूख चुकी हैं, जबकि 10 प्रतिशत सूखने की कगार पर हैं। इसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव अल्मोड़ा और रामनगर पर पड़ा है, क्योंकि इन दोनों ही घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए पानी का एक मात्र स्रोत कोसी नदी है।
डॉ.रावत के अनुसार विभिन्न शोध कार्यों के अवलोकन से निष्कर्ष निकल रहा है कि पिछले चार दशकों में मानव जनित जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तराखंड का औसत तापमान प्रति वर्ष .07 डिग्री की दर से बढ़ रहा है, जबकि बारिश के दिवसों की संख्या प्रति वर्ष 3 दिनों की दर से घट रही है, जोकि जल स्रोतों के सूखने (4 स्रोत प्रति वर्ग किमी) और नदियों के गिरते जल स्तर (22 लीटर प्रति सेकेंड) का मूल कारक है। ऐसे में घटते वर्षा जल को रिचार्ज क्षेत्रों में विभिन्न संरचनात्मक और जैविक विधियों से रोककर भौम जल भंडारण की आवश्यकता है। इसी आधार पर संपूर्ण प्राणिजात की सेवा के लिए उत्तराखंड सरकार ने प्रो.जे रावत के नेतृत्व में कोसी नदी के 14 से 20 रिचार्ज क्षेत्रों की पहचान कर कोसी पुनर्जनन का यह व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया है।
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